स्कंदमाता पूजन मंत्र
मुख्य मंत्र:
ॐ श्री स्कंदमातायै नमः
आराधना मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कंदमातायै नमः
स्तोत्र मंत्र:
स्कंदमाता श्री महादेवी,
स्कंदमाता इष्टदेवी ।
तुम्हारी महिमा अपरम्पार,
तुम्हारी शक्ति अनंत है ।
इन मंत्रों का जाप करने से स्कंदमाता की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति को सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य प्राप्त होता है।
मां स्कंदमाता का भोग
मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाया जाता है। यह उनका पसंदीदा फल है और इसे उन्हें अर्पित करने से विशेष फल प्राप्त होता है। इसके अलावा, मां स्कंदमाता को श्रीफल, पंचामृत, और अन्य मीठे व्यंजन भी अर्पित किए जा सकते हैं।
मां स्कंदमाता की पूजा विधि
पूजा के लिए आवश्यक सामग्री:
– मां स्कंदमाता की मूर्ति या चित्र
– पूजा की थाली
– अक्षत
– पुष्प
– धूप
– दीप
– नैवेद्य
– फल (विशेष रूप से केला)
– मिठाई
पूजा विधि:
1. स्नान और शुद्धिकरण: पूजा करने से पहले स्नान करें और शुद्ध वस्त्र पहनें।
2. पूजा स्थल की तैयारी: पूजा स्थल को साफ करें और मां स्कंदमाता की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें।
3. पूजा की थाली तैयार करें: पूजा की थाली में अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, फल और मिठाई रखें।
4. मां स्कंदमाता की पूजा करें: मां स्कंदमाता की मूर्ति या चित्र को पूजा की थाली से पूजा करें। अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें।
5. नैवेद्य और फल अर्पित करें: मां स्कंदमाता को नैवेद्य और फल (विशेष रूप से केला) अर्पित करें।
6. आरती करें: मां स्कंदमाता की आरती करें।
7. पूजा का समापन करें: पूजा का समापन करें और मां स्कंदमाता को धन्यवाद दें।
मां स्कंदमाता की पूजा के लाभ:
– मां स्कंदमाता की पूजा करने से व्यक्ति को सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य प्राप्त होता है।
– यह पूजा व्यक्ति को सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति दिलाती है।
– मां स्कंदमाता की पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में सफलता प्राप्त करने में मदद मिलती है।
मां स्कंदमाता की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, तारकासुर नाम का एक राक्षस था। तारकासुर ने ब्रह्मा जी की तपस्या की जिससे खुश होकर ब्रह्मा ने उसे मनचाहा वरदान मांगने को कहा। इसपर तारकासुर ने अमर होने का वरदान मांग लिया। हालांकि, ब्रह्मा जी ने तारकासुर को समझाते हुए कहा कि जो इस संसार में आया है, उसे एक ना एक दिन जाना पड़ता है। ब्रह्मा जी की बात सुनकर तारकासुर ने वरदान मांग लिया कि उसका वध सिर्फ भगवान शिव के पुत्र के हाथों से ही हो।
दरअसल, तारकासुर की ऐसी धारणा थी कि भगवान शिव कभी विवाह नहीं करेंगे, जिससे उसकी कभी मृत्यु नहीं होगी। ब्रह्मा जी से वरदान पाकर तारकासुर ने खुद को अमर समझ लिया और इसी घमंड में उसने देवताओं पर आतंक बढ़ाना शुरू कर दिया। तब देवताओं के कहने पर भगवान शिव ने साकार रूप धारण कर माता स्कंदमाता (इन्हें मां पार्वती भी कहा जाता है) से विवाह किया। मां पार्वती और भगवान शिव ने पुत्र स्कंद यानी कार्तिकेय को जन्म दिया। स्कंदमाता से युद्ध का प्रशिक्षण लेने के बाद कार्तिकेय ने तारकासुर का अंत किया।