मुख्यालय एमसीबी, कोरिया और सूरजपुर इन तीन जिलों में एक ही आरटीओ कार्यरत है। आम जनता आरटीओ आॅफिस जाती है और कार्यालय का चक्कर लगाकर वापस चली आती है। जानकार सूत्र बताते है कि, सूरजपुर के आरटीओ आॅफिस में बाबू सोनी अपने मनमानी ढंग से पैसे वसूलता है। यहां तक कि, लोगों में चर्चा है जो गाड़ी ट्रांसफर के लिए आती है चार चक्का व ट्रक के मालिकों से हजारों के तादात पर पैसा मांगा जाता है। क्योंकि वाहन मालिक को मजबूरीवश दस गुना पैसे देने पड़ते है। उसी प्रकार बैकुण्ठपुर का वही हाल है बताया जाता है कि, आरटीओ न तो सूरजपुर में बैठते है न तो बैकुण्ठपुर में। ऐसे में जो ट्रक पासिंग के लिए आते है। उनसे भी अनाप-सनाप पैसा लिया जाता है।
लोगों में तरह-तरह की चर्चाऐं है कि, क्या तीन जिले के कलेक्टर टीएल मीटिंग में इस बात का ध्यान नहीं देते कि, आरटीओ आम जनता के साथ बदसूलुकी व अभ्रद्र व्यवहार हो रहा है ? बाबू मालामाल और जनता बेहाल हो रहा है। कभी आरटीओ सप्ताहभर नदारद रहते है। जबकि तीन जिले में तीन दिन आरटीओ का टीएल मीटिंग होती है और शनिवार-रविवार छुट्टी पड़ती है तो एक आरटीओ कहां-कहां बैठेगा ? यह सोचने वाली बात है। क्यों जनता के लिए यह एक गंभिर समस्या है।