ग्रामीणों ने मशीनों से खुदाई, गुणवत्ता में कमी, पारदर्शिता के अभाव और 15 जून के बाद भी मिट्टी कार्य जारी रहने के लगाए आरोप; विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
विशेष संवाददाता : निलेश सोनी
सोनहत/कोरिया।
कोरिया जिले के सोनहत वन परिक्षेत्र में वन विभाग द्वारा कराए गए तालाब निर्माण कार्यों को लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। जल संरक्षण, वन्यजीवों के लिए पेयजल उपलब्ध कराने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से कराए गए इन कार्यों में अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए स्वतंत्र तकनीकी एवं भौतिक सत्यापन की मांग की गई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि जिन स्थानों पर कागजों में तालाब निर्माण पूर्ण दिखाया गया है, वहां कई जगह केवल उथले गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि यदि सभी निर्माण कार्यों का निष्पक्ष भौतिक सत्यापन कराया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि मजदूरों के बजाय जेसीबी और ट्रैक्टर जैसी मशीनों से रात के समय तेजी से खुदाई कर कार्य पूरा दिखाया गया। उनका कहना है कि यदि श्रम आधारित तरीके से निर्माण कराया जाता तो स्थानीय आदिवासी एवं ग्रामीण परिवारों को रोजगार भी मिल सकता था। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
गुणवत्ता पर भी सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई निर्माण स्थलों पर तालाबों में निर्धारित गहराई, चौड़ाई, मजबूत पाल (मेड़) तथा जल संरक्षण संबंधी आवश्यक तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया। उनका दावा है कि कुछ स्थानों पर केवल मिट्टी हटाकर निर्माण पूर्ण होने का दावा किया गया है।
15 जून के बाद भी कार्य होने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शासन के दिशा-निर्देशों के बावजूद 15 जून के बाद भी मशीनों से मिट्टी खुदाई का कार्य जारी रहा। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो यह शासन के निर्देशों के उल्लंघन का मामला भी बन सकता है।
सूचना पटल नहीं, पारदर्शिता पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश निर्माण स्थलों पर सूचना पटल तक नहीं लगाए गए हैं, जिससे लोगों को यह जानकारी नहीं मिल पा रही कि कार्य किस योजना के तहत स्वीकृत हुआ, उसकी लागत कितनी है और निर्माण किस एजेंसी द्वारा कराया गया।
जन सहयोग समिति ने की जांच की मांग
जिला पंचायत कोरिया जन सहयोग समिति के उपाध्यक्ष राजू साहू ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि सभी निर्माण स्थलों का स्वतंत्र भौतिक सत्यापन कराया जाए तथा स्वीकृत राशि, निर्माण की गुणवत्ता और भुगतान का विवरण सार्वजनिक किया जाए।
वहीं समिति से जुड़े पुष्पेंद्र राजवाड़े ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो ग्रामीणों के साथ आंदोलन किया जाएगा।
विभाग का पक्ष आना बाकी
वन विभाग पर लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। समाचार लिखे जाने तक विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी। विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

