हैदराबाद और इंदौर की एनसीबी टीम ने रतलाम में अल्प्राजोलम बनाने की अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। टीम ने फैक्ट्री को सील कर दिया है और दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। रविवार को दोनों आरोपियों का मेडिकल परीक्षण करवाकर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए इंदौर ले जाया गया।
पीएम नरेंद्र मोदी के ”नशा मुक्त भारत अभियान” के तहत एक महत्वपूर्ण कार्रवाई है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने अल्प्राज़ोलम की अवैध तैयारी में संलग्न एक गुप्त प्रयोगशाला को ध्वस्त किया है।
एनसीबी की टीम ने संदिग्ध स्थान और तस्करों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी हुई थी। इस दौरान टीम ने 13.762 किलोग्राम अल्प्राज़ोलम जब्त किया, जिसकी अनुमानित कीमत ₹3.44 करोड़ से अधिक है। एनसीबी ने इस मामले में दो आरोपियों, रूपसिंह (51) और अभिजीत सिंह चौहान (39) को गिरफ्तार किया है।
एनडीपीएस अधिनियम के तहत नियंत्रित साइकोट्रॉपिक पदार्थ अल्प्राज़ोलम के अवैध निर्माण में दोनों अभियुक्तों की भूमिका प्रारंभिक जांच से सामने आई है। अपनी फार्मास्यूटिकल पृष्ठभूमि और उपलब्ध सुविधाओं का उपयोग करते हुए, ये अभियुक्त जनवरी 2025 से ग्राम सेजावता के पास स्थित एक किराए के गोदाम में अवैध निर्माण में शामिल थे। अब एनसीबी की टीम उनके आपूर्ति तंत्र, वित्तीय लेन-देन और संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही है।
एनसीबी की रेड में प्रयोगशाला से नशीले पदार्थ के अलावा भारी मात्रा में उपकरण और रसायन भी बरामद किए गए। जब्त किए गए उपकरणों में राउंड बॉटम फ्लास्क, ऑयल बाथ, कंडेंसर, स्टिरर और थर्मामीटर शामिल हैं। इसके अलावा एथाइल एसीटेट, आइसोप्रोपाइल अल्कोहल, टोल्यून, मेथेनॉल, क्लोरोफॉर्म और ग्लेशियल एसिटिक एसिड जैसे रसायन भी बरामद किए गए।
गिरफ्तार आरोपियों का बैकग्राउंड
एनसीबी ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान रूप सिंह चौहान और अभिजीत सिंह चौहान के रूप में हुई है। रूप सिंह चौहान बीटेक स्नातक हैं और उन्होंने पहले कई फार्मास्यूटिकल कंपनियों में काम किया है। उनके खिलाफ 2021 में अल्प्राजोलम की तस्करी का मामला दर्ज किया गया था। अभिजीत सिंह चौहान बीफार्मा स्नातक हैं और उन्होंने पहले इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी में काम किया है। बाद में उन्होंने रूप सिंह चौहान के साथ फार्मास्यूटिकल और आयुर्वेदिक उत्पादों के व्यवसाय में साझेदारी की।
अल्प्राज़ोलम एक नियंत्रित औषधि है जो एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत आती है। इसका उपयोग अक्सर मनोरंजनात्मक नशे के रूप में किया जाता है और इसका दुरुपयोग एक बड़ी समस्या है। अल्प्राज़ोलम का उपयोग ताड़ी और हेरोइन में मिलावट के लिए भी किया जाता है, जिससे मुनाफे की दर बढ़ाई जाती है।



