शहडोल/जयसिंहनगर।
बेनी माधव कुशवाहा जी
आवेदक द्वारा वर्ष 2018 से 2026 तक पंचायत को प्राप्त शासकीय राशि, विभिन्न योजनाओं एवं निर्माण कार्यों का विस्तृत विवरण मांगा गया था।
इस पर ग्राम पंचायत सीधी के लोक सूचना अधिकारी द्वारा दिए गए जवाब में जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय यह कहा गया कि मांगी गई सूचना “विस्तृत एवं बहुविषयक” है, जिसके कारण इसे उपलब्ध कराना संभव नहीं है।
इस जवाब के बाद पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत यदि जानकारी अधिक या विस्तृत हो, तो भी संबंधित अधिकारी को आंशिक जानकारी प्रदान करने या अभिलेखों के निरीक्षण (inspection) का अवसर देना चाहिए।
हालांकि इस मामले में ऐसा कोई विकल्प आवेदक को प्रदान नहीं किया गया, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि सूचना उपलब्ध कराने से बचने का प्रयास किया गया है।

मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि RTI कानून का उद्देश्य शासन में पारदर्शिता लाना है, लेकिन इस तरह के जवाब कानून की मंशा के विपरीत प्रतीत होते हैं।
आवेदक अब इस मामले में प्रथम अपील की तैयारी कर रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी या नहीं।
सूचना अधिकार से जुड़े जानकारों के अनुसार, “सिर्फ यह कहकर जानकारी देने से इंकार नहीं किया जा सकता कि सूचना बड़ी या विस्तृत है। कानून के तहत वैकल्पिक समाधान देना अनिवार्य होता है।”
🔍 निष्कर्ष:
यह मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता की कसौटी बनता जा रहा है। आगे की कार्रवाई और अपील के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि सूचना वास्तव में उपलब्ध कराई जाएगी या नहीं।

