एमसीबी/04 जून 2026/ दुःख और संकट की घड़ी में संवेदनशील प्रशासन किस प्रकार आमजन के साथ खड़ा होता है, इसका उदाहरण मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में देखने को मिला। आकाशीय बिजली गिरने से एक महिला की असामयिक मृत्यु के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 24 घंटे के भीतर उनके परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत कर उनके बैंक खाते में अंतरित करा दी। इसके साथ ही परिवार को मनरेगा के तहत 25 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भरतपुर विकासखंड के ग्राम चरखर निवासी श्रीमती सुशीला बाई, पति गेन्दलाल सिंह की मंगलवार को आकाशीय बिजली गिरने से दुःखद मृत्यु हो गई थी। परिवार पर अचानक आए इस वज्रपात की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी सुश्री संतन देवी जांगड़े के निर्देशन में राजस्व विभाग ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करते हुए प्राकृतिक आपदा राहत मद से मृतिका के वैध वारिस के पक्ष में 4 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत एवं जारी कर दी।


बुधवार को ग्राम खोहरा में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर के दौरान परिजनों को सहायता राशि स्वीकृत होने एवं उनके बैंक खाते में राशि जमा होने की जानकारी दी गई। अपनों को खोने के असहनीय दुःख के बीच प्रशासन की इस त्वरित और मानवीय पहल ने परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करने के साथ यह भरोसा भी दिलाया कि संकट की घड़ी में शासन उनके साथ खड़ा है।
राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के प्रावधानों के तहत स्वीकृत यह सहायता प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत पहुंचाने की शासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। घटना के मात्र 24 घंटे के भीतर सहायता राशि स्वीकृत एवं भुगतान होना प्रशासन की संवेदनशील कार्यशैली, त्वरित निर्णय क्षमता और जनसेवा के प्रति समर्पण का उदाहरण माना जा रहा है।
कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित प्रत्येक पात्र परिवार को शासन द्वारा निर्धारित सहायता समय पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि कठिन परिस्थितियों में उन्हें तत्काल राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं का पालन करना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों तक शीघ्र सहायता पहुंचाकर उन्हें संबल और विश्वास प्रदान करना भी है।
जिला प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि सुशासन का वास्तविक अर्थ केवल योजनाओं का संचालन नहीं, बल्कि जरूरत के समय संवेदनशीलता, मानवीयता और जवाबदेही के साथ लोगों के जीवन में सहारा बनकर खड़ा होना भी है।

