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जशपुर/CG : कलेक्टर और डीएफओ के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर जशपुर में बढ़ रहा आक्रोश…………

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मुख्यालय जशपुर ब्लॉक मनोरा में वन विभाग के लगभग 25 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे का मामला उजागर हुआ है। आरोप है कि हरे-भरे पेड़ों को काटकर जमीन पर खेती की जा रही है और अवैध रूप से कब्जा किया गया है। इस जमीन पर मक्का, सरसों और अन्य फसलों की खेती भी की जा रही है। जानकार सूत्र बताते है कि पैसे के बल पर सभी कार्य हो रहे हैं और वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा किया जा रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार, कलेक्टर और डीएफओ अपनी मित्रता का फायदा उठाकर आम जनता का शोषण कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि छत्तीसगढ़ में मंत्री नहीं, बल्कि आईएएस अधिकारी ही शासन चला रहे हैं। छत्तीसगढ़ में एक नियम है कि टीएल मीटिंग मंगलवार को होती है, लेकिन कलेक्टर अपनी मनमर्जी से कभी भी मीटिंग बुला लेते हैं। इससे यह प्रतीत होता है कि आईएएस अधिकारी ही छत्तीसगढ़ शासन को चला रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, जशपुर में भी अब आवाज उठने लगी है कि, डीएफओ जशपुर मनोरा के जंगलों को बेचने में लगे हुए हैं और हरे-भरे पेड़ों कटवा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि जब से कलेक्टर और डीएफओ जशपुर आए हैं, तब से जनता को तरह-तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है। वहीं मनोरा की रहने वाली एक महिला ने आरोप लगाया है कि कलेक्टर ने उन्हें प्रताड़ित किया और एक करोड़ रुपये की मानहानि का दावा करने की धमकी दी। महिला ने रोते हुए संपादक को मोबाइल पर अपनी पूरी बात बताई और कलेक्टर की धमकियों के बारे में जानकारी दी। अब देखना यह है कि जशपुर कलेक्टर और डीएफओ शशि कुमार के मक्का, सरसों और अन्य फसलों को जप्त करेंगे या नहीं। इससे यह साबित होता है कि प्रशासन पैसे के बल पर काम कर रहा है और यह प्रताड़ना का मामला उजागर हो रहा है।

लोगों में चर्चा है कि, 25 एकड़ जमीन के अवैध कब्जे के मामले में कुछ अधिकारियों को लगभग दस लाख रुपये दिए गए हैं। इससे अवैध कब्जाधारी किसी भी प्रकार की कार्रवाई से बेफिक्र हैं। वशिष्ठ टाइम्स की टीम जशपुर में इस मामले की जांच कर रही है और जल्द ही बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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