सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान शिक्षक, दार्शनिक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति थे। उनका जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरूतनी में एक गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम सर्वपल्ली वीरास्वामी और माता का नाम सीताम्मा था। और उनके जन्मदिन को भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर हम उनके कुछ प्रेरणादायक कोट्स को याद करना चाहेंगे जो शिक्षकों और छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत हो सकते हैं। इस दिन को मनाने की परंपरा तब शुरू हुई जब डॉ. राधाकृष्णन ने अपने छात्रों से कहा कि उनके जन्मदिन को मनाने के बजाय इसे शिक्षक दिवस के रूप में मनाना अधिक उचित होगा। उनकी यह विनम्रता और शिक्षण पेशे के प्रति सम्मान आज भी प्रेरणा का स्रोत है।
उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ
डॉ. राधाकृष्णन 1952 से 1962 तक भारत के उपराष्ट्रपति और 1962 से 1967 तक भारत के राष्ट्रपति रहे। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई विश्वविद्यालयों में दर्शनशास्त्र की शिक्षा दी और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं जिनमें धर्म और समाज, भारत और विश्व, गौतम बुद्ध, जीवन और दर्शन, प्रमुख हैं। उन्हें 1954 में भारत सरकार ने भारत रत्न से सम्मानित किया और अमेरिकन गवर्नमेंट द्वारा टेंपलटन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
उनके शैक्षिक विचार
शिक्षा को सर्वोपरि मानते थे और उनका मानना था कि समाज और राष्ट्र के भविष्य में परिवर्तन लाने के लिए शिक्षा का उपयोग हथियार के रूप में करना चाहिए। वे शिक्षा के माध्यम से मानव मस्तिष्क का सदुपयोग करने के पक्षधर थे। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का निधन 17 अप्रैल 1975 को हुआ था।
शिक्षक दिवस का उद्देश्य केवल एक व्यक्ति की जयंती का सम्मान करना नहीं है, बल्कि उन सभी शिक्षकों को धन्यवाद देना है जो समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करते हैं।



