Home नवरात्रि चैत्र नवरात्रि का छठा दिन, मां कात्यायनी की पूजा विधि और महत्व…………..

चैत्र नवरात्रि का छठा दिन, मां कात्यायनी की पूजा विधि और महत्व…………..

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आज यानी शुक्रवार, 4 अप्रैल को चैत्र नवरात्रि का छठा दिन है। नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप, मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। मां कात्यायनी का रंग सुनहरा है। उनकी चार भुजाएं हैं, जिसमें दाहिने हाथों में मां अभय और वर मुद्रा में हैं। वहीं, बाएं हाथों में मां तलवार और कमल का फूल धारण करती हैं। कात्यायनी मां सिंह पर सवार रहती हैं। मान्यताओं के अनुसार, चैत्र नवरात्रि के छठे दिन कात्यायनी मां की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से रोग, शोक और भय से छुटकारा मिलता है।

मां कात्यायनी की पूजा विधि

पूजा के लिए आवश्यक सामग्री:

– मां कात्यायनी की मूर्ति या चित्र
– पूजा की थाली
– अक्षत
– पुष्प
– धूप
– दीप
– नैवेद्य
– फल (विशेष रूप से शहद और मिठाइयाँ)
– मिठाई

पूजा विधि:

1. स्नान और शुद्धिकरण: पूजा करने से पहले स्नान करें और शुद्ध वस्त्र पहनें।
2. पूजा स्थल की तैयारी: पूजा स्थल को साफ करें और मां कात्यायनी की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें।
3. पूजा की थाली तैयार करें: पूजा की थाली में अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, फल और मिठाई रखें।
4. मां कात्यायनी की पूजा करें: मां कात्यायनी की मूर्ति या चित्र को पूजा की थाली से पूजा करें। अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें।
5. नैवेद्य और फल अर्पित करें: मां कात्यायनी को नैवेद्य और फल (विशेष रूप से शहद और मिठाइयाँ) अर्पित करें।
6. आरती करें: मां कात्यायनी की आरती करें।
7. पूजा का समापन करें: पूजा का समापन करें और मां कात्यायनी को धन्यवाद दें।

मंत्र:

ॐ श्री कात्यायनी महामाये महायोगिन्यै नमः

भोग:

मां कात्यायनी को शहद और मिठाइयाँ अर्पित करना शुभ माना जाता है।

शुभ रंग:

मां कात्यायनी के लिए शुभ रंग लाल है।

स्तुति मंत्र:

या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां कात्यायनी की कथा 

पौराणिक कथा के अनुसार, प्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती जगदम्बा की कठोर तपस्या की थी। उनकी इस तपस्या से मां इतनी खुश हुईं कि उन्होंने महर्षि कात्यायन के यहां पुत्री बनकर जन्म लेने का वरदान दिया। मां जगदम्बा ने महर्षि के यहां पुत्री रूप में जन्म लिया, जिसके बाद वे मां कात्यायनी कहलाईं। माना जाता है कि मां कात्यायनी ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कराया था, इसलिए उन्हें महिषासुर मर्दनी भी कहा जाता है।

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