प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैंक के द्वारा गड्डियों के एवज में कमीशन लिया जा रहा है। ऐसा कौन सा व्यक्ति है जो कि बैंक की छवी को बिगाड़ने में लगे हुए है ? क्योंकि बैकुण्ठपुर ब्रांच मनेजर को शिकायत किया जाता है तो ब्रांच मनेजर भी अपने स्टाॅफ के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं कर पा रहे है। स्टेट बैंक से नई करंेसी को ब्लेक करने के मामले में अपराध बहुत बड़ा बनता है। स्टेट बैंक एक समाज सेवा की श्रेणी में आता है। हितग्राहियों के स्वेच्छा को पूर्ण करता है पर बैंक के कर्मचारी ही नयी गड्डियों को वेतन के रूप में ले जाते है। सोचने वाली बात है कि, लोगों के हित का काम नहीं, अपने स्वार्थ के लिए करेंसी ले जा रहे है। इस संबंध में क्षेत्रिय स्टेट बैंक प्रबंधक अपने बैंक की विश्वसनीयता को भंग कर रहे है इस पर कार्यवाही करे।
बैकुण्ठपुर/कोरिया : स्टेट बैंक में नई करेंसी का कालाबाजारी किसके इशारे पर ?……………………
जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में भारतीय स्टेट बैंक का एक अनोखा मामला सामने आया है। जानकार सूत्र बताते है कि, यहां कर्मचारियों द्वारा कैश काउंटर पर बैंक के नियम को शिथिल करते हुए देखा जा रहा है और वहीं बाबू 12 बजे बैठते है। हितग्राहियों के अनुसार, ब्रांच मनेजर इन लापरवाही के कारण बन रहे है। क्योंकि ब्रांच मनेजर को शिकायत करने के बावजूद भी कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। लोगों को स्टेट बैंक में अपने पैसे को लेकर चार-पांच घण्टे खड़ा होना पड़ता है। यहां तक कि, लोगों में चर्चा है नवरात्रि का समय है लोगों को कन्या को खिलाने के लिए, दान व उपहार देने के लिए नये रूपयों की जरूरत पड़ती है। लेकिन नई करेंसी विलुप्त हो जाती है। इसका क्या कारण है ?