सूरजपुर कलेक्टर श्रीमती रेना जमील की अध्यक्षता में आज जिला संयुक्त कार्यालय के सभाकक्ष में स्वास्थ्य विभाग की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित हुई, जिसमें जिले में संचालित राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्री विजेन्द्र पाटले, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कपिल पैकरा, सिविल सर्जन डॉ. अजय मरकाम, डीपीएम श्री संदीप नामदेव, समस्त खंड चिकित्सा अधिकारी तथा विभिन्न कार्यक्रमों के नोडल एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में कलेक्टर ने एनीमिया की स्थिति पर सर्वाधिक गंभीरता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रत्येक लक्षित हितग्राही तक समय पर पहचान, जांच, उपचार एवं पोषण परामर्श पहुंचना अनिवार्य है। उन्होंने सीएमएचओ को ग्राम पंचायत स्तर तक विशेष अभियान संचालित कर अधिक से अधिक बच्चों, किशोरियों एवं गर्भवती महिलाओं को इसके दायरे में लाने तथा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप प्रगति की सतत निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल जांच तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य रोकथाम एवं उपचार सुनिश्चित करना है, ताकि रक्ताल्पता के कारण किसी भी बच्चे, किशोरी अथवा गर्भवती महिला की जान न जाए। इसके लिए उन्होंने समस्त संबंधित विभागों को संवेदनशीलता के साथ मिशन मोड में कार्य करने का आह्वान किया।
- – कलेक्टर ने विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रगति की कि समीक्षा
- – ‘‘जांच तक सीमित न रहे अभियान, रोकथाम और उपचार भी सुनिश्चित हो‘‘ – कलेक्टर
- – फोकस, समयबद्ध रिपोर्टिंग के निर्देश शिशु व मातृ मृत्यु दर को नगण्य करने दिशा में करे कार्य

संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने पर विशेष बल देते हुए कलेक्टर ने कहा कि अधिक से अधिक प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में कराए जाने से ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में अपेक्षित कमी लाई जा सकती है। उन्होंने मैदानी अमले को गर्भवती महिलाओं को इसके लिए निरंतर प्रेरित करने तथा दोनों मृत्यु दरों को नगण्य स्तर पर लाने की दिशा में सुनियोजित प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने पोषण पुनर्वास केंद्र में गंभीर कुपोषित बच्चों को चिन्हांकित कर भर्ती कराने एवं उन्हें समुचित उपचार उपलब्ध कराने पर भी जोर देते हुए कुपोषण प्रभावित प्रत्येक बच्चे तक पहुंच सुनिश्चित करने को कहा।
समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य इंडिकेटर, मातृ स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, नियमित टीकाकरण, विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, एनीमिया मुक्त भारत, सिकल सेल, क्षय एवं कुष्ठ उन्मूलन, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण, अंधत्व नियंत्रण, गैर संचारी रोग, मानसिक तथा मुख स्वास्थ्य, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, टेली परामर्श, डायलिसिस सेवाएं, वित्तीय प्रगति एवं आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की बिंदुवार पड़ताल की गई। क्षेत्रवार आकलन करते हुए संचारी रोग नियंत्रण अभियान तथा दस्तक अभियान के प्रभावी संचालन की रणनीति पर भी विचार-विमर्श हुआ।

कलेक्टर ने आरसीएच पोर्टल में शत-प्रतिशत प्रविष्टि तथा यू-विन पोर्टल पर समस्त टीकाकरण सत्रों के नियमित अद्यतन के निर्देश देते हुए ऑनलाइन रिपोर्टिंग में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरतने की हिदायत दी। योजनाओं से जुड़े लंबित भुगतानों का निराकरण अधिकतम सात दिवस के भीतर करने को भी कहा गया। उन्होंने कहा कि समस्त स्वास्थ्य कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन शासन की प्राथमिकता है, अतः अधिकारी एवं कर्मचारी आपसी समन्वय, नियमित मॉनिटरिंग तथा समयबद्ध रिपोर्टिंग के साथ जनसामान्य तक सेवाओं का लाभ पहुंचाना सुनिश्चित करें।

