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’’जल जीवन मिशन से पंडोपारा में पहुंचा नल का जल, आसान हुई ग्रामीणों की जिंदगी’……..

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’वर्षों की पेयजल समस्या का हुआ समाधान, घर-घर नल से मिल रहा शुद्ध पानी’

’कोरिया  सितम्बर 2026/’ कहा जाता है-जल है तो कल हैश्। पानी और जिंदगी एक-दूसरे के पूरक हैं। इसी सोच को साकार करते हुए जल जीवन मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर नल से जल पहुंचाकर लोगों के जीवन में बदलाव ला रहा है। कोरिया जिले के ग्राम चोपन के पंडोपारा बस्ती में भी इस योजना ने वर्षों पुरानी पेयजल समस्या का समाधान करते हुए ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाया है।

पहाड़ों की तलहटी में बसी यह बस्ती ग्राम पंचायत बरपारा का आश्रित ग्राम है और जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां के ग्रामीण लंबे समय से पेयजल की समस्या से जूझ रहे थे। पानी के लिए उन्हें दूर तक जाना पड़ता था, जिससे समय और श्रम दोनों खर्च होते थे।

जल जीवन मिशन की शुरुआत के बाद ग्राम चोपन में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया गया। इसके परिणाम स्वरूप अब ग्रामीणों के घरों तक नल के माध्यम से पानी पहुंच रहा है। स्वच्छ एवं सहज रूप से उपलब्ध पेयजल ने ग्रामीण परिवारों की दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव लाया है।

हितग्राही श्रीमती संगीता बताती हैं, “पहले पानी भरने के लिए दूर जाना पड़ता था। इसमें समय और मेहनत दोनों लगते थे। अब घर पर ही साफ पानी आसानी से मिल रहा है। इससे समय की बचत हो रही है और परिवार के दूसरे जरूरी कामों के लिए भी समय मिल जाता है। गांव में शुद्ध पेयजल की सुविधा मिलने से जीवन काफी आसान हो गया है।”

’पानी के साथ बढ़ी स्वच्छता और जागरूकता’
जल जीवन मिशन का प्रभाव केवल घरों तक पानी पहुंचाने तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों को जल संरक्षण, पानी की गुणवत्ता, स्वच्छता और नल कनेक्शन के रख-रखाव के संबंध में भी जागरूक किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों में अपनी जल व्यवस्था को सुरक्षित रखने और उसके बेहतर उपयोग की जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई है।

’नल का जल बना सम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक’
ग्राम चोपन के पंडो पारा में घर-घर नल से जल पहुंचना ग्रामीणों के लिए महज एक सुविधा नहीं, बल्कि सम्मान, सुविधा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गया है। पंचायत, विभाग और ग्रामीणों के समन्वित प्रयासों से जल जीवन मिशन ने बस्ती की दिशा और दशा बदलने का कार्य किया है।

यह बदलाव बताता है कि जब योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी साथ आती है, तो विकास की योजनाएं कागजों से निकलकर लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाती हैं। जल जीवन मिशन ग्रामीण विकास की स्थायी और मजबूत नींव तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है

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सेवा से समृद्धि की ओर बढ़ता कोरियाः मत्स्य पालन से 25 सदस्यों को मिला आत्मनिर्भरता का संबल

कोरिया  सितम्बर 2026/ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आजीविका को मजबूत कर रही हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के हितग्राहियों तक पहुंचाने के प्रयासों से कोरिया जिले में भी आत्मनिर्भरता की नई तस्वीर सामने आ रही है। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से ऐसी ही प्रेरक कहानियों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्राम पुटा की मछुआ सहकारी समिति मर्यादित के अध्यक्ष श्री नीरज एवं हितग्राही श्री पदमेश चक्रधारी और समिति के 25 सदस्यों की कहानी इसी बदलाव की मिसाल है। कभी केवल कृषि पर निर्भर रहने वाले समिति के सदस्यों ने मत्स्य पालन को अतिरिक्त आजीविका के रूप में अपनाया और सरकारी योजना के सहयोग से अपनी आय बढ़ाने में सफलता हासिल की।

कृषि के साथ मत्स्य पालन को बनाया आय का अतिरिक्त साधन
श्री पदमेश चक्रधारी बताते हैं कि पहले उनकी आजीविका मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर थी। कृषि से होने वाली आय सीमित होने के कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में कठिनाई आती थी। ऐसे में आय का अतिरिक्त साधन तलाशते हुए उन्होंने ग्राम के शासकीय जलाशय को 10 वर्षीय पट्टे पर लेकर मत्स्य पालन शुरू किया।

मत्स्य पालन विभाग की ‘मत्स्य पालन प्रसार’ योजना के अंतर्गत समिति को शत-प्रतिशत अनुदान पर 25 लाख स्पान मत्स्य बीज, 6 हजार का आइस-बॉक्स और 40 हजार मूल्य का गिलनेट उपलब्ध कराया गया। साथ ही पट्टा राशि में भी नियमानुसार अनुदान का लाभ दिया गया। विभागीय मार्गदर्शन से मत्स्य बीज का संवर्धन कर जलाशय में संचयन किया गया, जिससे मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा मिला।

1.98 लाख से बढ़कर 5.04 लाख रुपये हुई वार्षिक आय
योजना से पहले समिति की अनुमानित आय लगभग 16,500 प्रतिमाह यानी 1.98 लाख वार्षिक थी। मत्स्य पालन को व्यवस्थित रूप से अपनाने और विभागीय सहयोग मिलने के बाद वर्तमान आय लगभग 42,000 प्रतिमाह यानी 5.04 लाख वार्षिक तक पहुंच गई है।

आय में इस वृद्धि से समिति के सदस्यों की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है। परिवारों की आवश्यकताओं की पूर्ति बेहतर ढंग से हो रही है और सदस्यों में आत्मनिर्भरता का विश्वास मजबूत हुआ है।

सेवा संकल्प से सामने आ रही बदलाव की कहानियां
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सेवा, सुशासन और जनभागीदारी के भाव को आगे बढ़ाते हुए तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शासन की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत कोरिया जिले में ऐसी सफलता की कहानियों को सामने लाया जा रहा है।

पुटा की नीरज मछुआ सहकारी समिति की सफलता यह संदेश देती है कि जब सरकारी योजना का सहयोग, विभागीय मार्गदर्शन और हितग्राहियों का प्रयास एक साथ जुड़ता है, तो आजीविका के नए रास्ते खुलते हैं। कृषि के साथ मत्स्य पालन को अपनाकर समिति के 25 सदस्य अब आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

यह कहानी केवल बढ़ी हुई आय की नहीं, बल्कि सेवा से मिले अवसर को आजीविका और आत्मनिर्भरता में बदलने की कहानी है जो सेवा संकल्प अभियान के मूल भाव को सार्थक करती है।

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