कोरिया
जिला कोरिया बैकुण्ठपुर में नगरपालिका के चुनाव का चर्चाए जोरो सोरो पर चल रहीं हैं। लोक तंत्र का हिस्सा चुनाव कहलाता हैं। पर इस लोकतंत्र को लोगो के विचार धाराए अलग अलग तरीके से उपयोग किया जा रहा है। चुनाव समय के आधार पर सेवा भाव नही रह गया है। खाली एक व्यापार के रूप में बदलाव आ चुका है। लोग अच्छी अच्छी नौकरयो को ताक पर रखकर चल रहें हैं। उदाहरण के बतौर पर कलेक्टर जैसी नौकरी जिसमें वेतन व उपरी कमाई होते हुए भी संतुष्टी नही मिल रही है। इससे साबित हो रहा है व देखने को भी रहा है की नौकरी छोड़ने के पश्चात भी और राजनितिक में आने के बाद भी करोड़ो के आसामी बन चुके है।

नगरपालिका ही नहीं जिसमें आज हर व्यक्ति चुनाव के दावेदारी कर रहें हैं। यहा तक की राजनितिक वाले धर्म को भी राजनितिक में ला दिया गया है। आज देखा जाय कोई भी छोटा से छोटा हो धर्म की राजनितिक करते चले आ रहें है।
एक कहावत है कलयुग में झुठे व बेईमान व शराबी गजेड़ीयो का समुह बन चुका है जिसमें कोई भी जाती अछुती नहीं रह गई है। यहा तक की अध्यक्ष पद के लिए पारषदो को खरीदन भी जानते है। काग्रेस हो या बी जे पी इनको छोटा भाई व बड़ा भाई मानकर चलना चाहिए हैं दोनो एक समान । इन लोगो की देन है की बैकुण्ठपुर का विभाजन ऐ सब नेताओ की मिली जूली देन है। खाली अपना स्वार्थ, अपना समाज, व अपनी जाती देखी जा रहीं हैं।

कोई भी पार्टी हो दोनो पार्टी से दावे दारी 15-15 व 20-20 लोगो की दावेदारी पेष की जा रहीं है। क्योंकि दिख रहा है कि करोड़ो रूपए नगरपालिका में आता है जिसमें 10-20 लाख रूपये ही जन हीत में उपयोग होता है। बाकी का फर्जी बिल लगाकर पैसा निकाल लिया जाता है। इसलिए सभी लोग नगरपालिका हो या विधानसभा हो लालसा रखे हुए हैं। अभी बैकुण्ठपुर नगरपालिका का चुनाव के मद्दे नजर अभी जल्दी में किसी के नामों का नांकित कीया जाना मुस्किल है।

