सोनहत
वशिष्ठ टाइम्स
RNI NO. – 2006/23349
गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व क्षेत्र में जल संरक्षण के उद्देश्य से निर्मित स्टॉप डैम, तालाब और अन्य जल संरचनाओं की उपयोगिता पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

रिपोर्ट : नीलेश सोनी
विशेष संवाददाता |कोरिया।
क्षेत्र में अच्छी वर्षा होने के बावजूद कई स्थानों पर जल संरचनाओं में अपेक्षित स्तर तक पानी का संग्रह नहीं हो सका, जिससे वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जल संरचनाओं में पानी टिक नहीं रहा, जबकि कुछ स्थानों पर निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि कागज़ों में जल संरक्षण के दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कई संरचनाएँ अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही हैं।
वन क्षेत्र में गर्मी के मौसम में जल स्रोतों की कमी वन्यजीवों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

यदि समय रहते इन संरचनाओं का तकनीकी मूल्यांकन और आवश्यक सुधार नहीं किया गया, तो वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि जल संरक्षण से जुड़ी सभी परियोजनाओं की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए।

साथ ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, खर्च की गई राशि और वास्तविक उपयोगिता की निष्पक्ष समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

जल संरक्षण योजनाओं का उद्देश्य तभी सफल माना जाएगा,

जब निर्मित संरचनाएँ वर्षा जल का प्रभावी संचयन करें और पूरे वर्ष वन्यजीवों व स्थानीय पर्यावरण के लिए उपयोगी सिद्ध हों।

जनता की प्रमुख मांगें
जल संरचनाओं का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराया जाए।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच हो।
जिन स्थानों पर अनियमितता मिले, वहां जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।
वन्यजीवों के लिए स्थायी जल स्रोत विकसित किए जाएं।
भविष्य की जल संरक्षण योजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।

