जशपुर-सरगुजा के कारीगरों ने दिया प्रशिक्षण, स्वरोजगार की संभावनाओं से भी कराया परिचित
कोरिया, अब पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। हुनर के हाथों से भविष्य गढ़ने की तैयारी भी स्कूलों में शुरू हो गई है। कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को भारतीय हस्तशिल्प परंपराओं और स्थानीय कला-कौशल से जोड़ने की अभिनव पहल के तहत शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैकुंठपुर एवं स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय महलपारा में वुडन आर्ट और बंबू आर्ट का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने प्रशिक्षण में भाग लेकर लकड़ी और बांस से कलात्मक वस्तुएं तैयार करने की तकनीक सीखी।

हुनर की पाठशाला में खुला रोजगार का रास्ता
भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय, विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), सेवा केंद्र नया रायपुर द्वारा वर्ष 2026-27 के दौरान आयोजित प्रदर्शन-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थियों को पारंपरिक हस्तशिल्प की बारीकियों से परिचित कराया गया। जशपुर और सरगुजा के कारीगरों ने विद्यार्थियों को वुडन आर्ट और बंबू आर्ट की तकनीक, निर्माण प्रक्रिया और शिल्प की बारीकियां व्यावहारिक रूप से समझाईं।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने केवल शिल्प को देखा नहीं, बल्कि उसे अपने हाथों से बनाकर सीखने का अनुभव भी प्राप्त किया। इससे उनमें रचनात्मकता, कौशल और पारंपरिक कला के प्रति रुचि बढ़ी।
नई शिक्षा नीति की भावना को मिला धरातल
यह प्रशिक्षण नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की उस सोच को मजबूत करता है, जिसमें विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावसायिक एवं कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ने पर जोर दिया गया है। हस्तशिल्प प्रशिक्षण विद्यार्थियों को भविष्य में रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान कर सकता है।
स्थानीय कला से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम
वुडन और बंबू आर्ट जैसे पारंपरिक शिल्प केवल कला नहीं, बल्कि रोजगार और आत्मनिर्भरता के संभावित माध्यम भी हैं। प्रशिक्षण के जरिए विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल को आधुनिक सोच के साथ जोड़कर आय का साधन और करियर का विकल्प बनाया जा सकता है।
प्रशिक्षण की खास बातें
दो विद्यालय, बैकुंठपुर और महलपारा में आयोजन, सैकड़ों विद्यार्थियों को प्रशिक्षण का मिला लाभ, दो पारंपरिक शिल्प वुडन आर्ट एवं बंबू आर्ट औऱ दो प्रमुख क्षेत्र जशपुर एवं सरगुजा के कारीगरों ने दिया प्रशिक्षण
कारीगरों से सीधे सीखा हुनर
प्रशिक्षण में जशपुर एवं सरगुजा के कारीगरों ने विद्यार्थियों को पारंपरिक शिल्प की बारीकियां बताईं। इससे विद्यार्थियों को स्थानीय कला और कारीगरों की मेहनत को करीब से समझने का अवसर मिला।
पढ़ाई-कौशल और बेहतर भविष्य
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ व्यावसायिक कौशल से जोड़ने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रशिक्षण से मिले व्यावहारिक अनुभव भविष्य में विद्यार्थियों के करियर में उपयोगी साबित हो सकते हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार वस्त्र मंत्रालय, विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), सेवा केंद्र नया रायपुर के सहायक निदेशक श्री मनोज राठी, विद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

