वशिष्ठ टाइम्स अखबार
बैकुंठपुर/सोनहत
(कोरिया)।
सोनहत वन परिक्षेत्र में वन विभाग द्वारा कराए जा रहे तालाब निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं, जेसीबी मशीनों के उपयोग और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व विधायक प्रत्याशी श्याम सिंह मरकाम ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय गरीब एवं आदिवासी मजदूरों का रोजगार छीनकर मशीनों से कार्य कराना शासन की मंशा और नियमों के विपरीत है तथा ऐसे मामलों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
श्याम सिंह मरकाम ने आरोप लगाया कि तालाब निर्माण कार्यों का उद्देश्य स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन कई स्थानों पर जेसीबी मशीनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से कार्य कराए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह गरीब मजदूरों के अधिकारों का हनन और सरकारी योजनाओं की भावना के विपरीत है।
इसी मुद्दे को लेकर कोरिया जन सहयोग समिति के प्रतिनिधिमंडल ने वनमंडलाधिकारी के नाम शिकायत-पत्र सह ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की मांग की।
वनमंडलाधिकारी की अनुपस्थिति में ज्ञापन उप वनमंडलाधिकारी (एसडीओ फॉरेस्ट) को सौंपा गया।
श्याम सिंह मरकाम ने मांग की कि तालाब निर्माण कार्यों में मशीनों के उपयोग पर तत्काल रोक लगाई जाए, आठ से दस निर्माणाधीन तालाबों की तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण की गुणवत्ता का परीक्षण किया जाए तथा यह भी जांच की जाए कि कहीं तालाब निर्माण के नाम पर केवल भूमि समतलीकरण तो नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि दोषियों के विरुद्ध समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो गोंडवाना गणतंत्र पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन शुरू करेगी।
इस दौरान कोरिया जन सहयोग समिति के अध्यक्ष पुष्पेंद्र राजवाड़े ने भी कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना आवश्यक है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
कार्यकारी अध्यक्ष अधिवक्ता जयचंद सोनपाकर ने निष्पक्ष जांच नहीं होने पर कानूनी लड़ाई और जनआंदोलन की चेतावनी दी।
कानूनी सलाहकार अधिवक्ता संजय साहू ने स्थानीय मजदूरों को प्राथमिकता देने और जेसीबी मशीनों के उपयोग पर रोक लगाने की मांग रखी।
वरिष्ठ अधिवक्ता रजा अली अंसारी ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय की शरण भी ली जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल की बात सुनने के बाद एसडीओ फॉरेस्ट ने शिकायत में उठाए गए बिंदुओं की निष्पक्ष जांच कराने तथा जांच प्रतिवेदन के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया।

