Home एम.सी.बी. कोरिया, इतवरिया और तुलसी जैसी सैकड़ों महिलाओं की नई उम्मीद बनी आजीविका...

कोरिया, इतवरिया और तुलसी जैसी सैकड़ों महिलाओं की नई उम्मीद बनी आजीविका डबरी अतिरिक्त स्वरोजगार का विकल्प लेकर जल संसाधन के लिए 395 डबरी बनकर तैयार

11
0
hey

कोरिया

कोरिया, 29 जुलाई 2026/ खेतों में किसान की मेहनत को सही उपज मिल सके उसके लिए जरूरी है कि उसके खेतों में सिंचाई की सुविधा का संसाधन उपलब्ध हो। यह संसाधन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब उसके खेतों में सिंचाई की सुविधा के साथ अतिरिक्त आमदनी का जरिया भी बन जाए। इसी तरह की संकल्पना लेकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग कोरिया द्वारा मोर गांव मोर पानी महाभियान अंतर्गत बीते दो वर्षों में जिले के 395 किसानों के खेतों में डबरी बनाई गई हैं। सिंचाई की सुविधा के साथ मछलीपालन जैसे विकल्प भी देने से यह डबरी अब केवल जल संसाधन नहीं बल्कि उनके परिवार के लिए एक आजीविका डबरी बन गई हैं। जिले में श्रीमती इतवरिया और तुलसी जैसी सैकड़ों महिलाओं के लिए बारिश के साथ लगातार जलमग्न हो रही इन डबरियों से मछलीपालन एक अतिरिक्त रोजगार का अवसर बनकर उभर रहा है।

संसाधन की अधिकारिता
कोरिया जिले में दो वर्षों में ग्रामीण महिलाओं की आजीविका में बदलाव के लिए 395 आजीविका डबरियों का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। 25 गुणा 25 मीटर साइज की इन डबरियों को जलसंसाधन के तौर पर विकसित किया गया है। साथ ही इन डबरियों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए समूह में संलग्न परिवार की महिलाओं का नाम भी पटल पर अंकित किया गया है। इससे अपने संसाधन पर महिलाओं की सामाजिक अधिकारिता को भी विस्तार मिला है।

जलसंसाधन और स्वरोजगार
किसानों के निजी खेतों में बनाई गई इन आजीविका डबरियों से उन्हे अपने कम से कम एक एकड़ खेतों में सिंचाई के लिए सुविधा उपलब्ध हो गई है। अब यह डबरियां जलसंसाधन के साथ ही महिलाओं के लिए आजीविका का एक नया विकल्प बनकर तैयार हैं। इनमें आठ माह से ज्यादा समय तक जलभराव होने से यह मछलीपालन के अतिरिक्त स्वरोजगार के अवसर बनकर तैयार हैं।

मछलीपालन से करेंगे अतिरिक्त कमाई
ग्राम पंचायत पोटेडांड में रहने वाले बबन सिंह की धर्मपत्नी तुलसी और ग्राम पंचायत चिल्का में रहने वाली इतवरिया अपनी आजीविका डबरी के सूचना पटल पर अपना नाम देखकर काफी खुश हैं। उन्होने बताया कि हमारी आजीविका डबरी में बारिश से अच्छा पानी भर रहा है, इससे खेतों में धान की नर्सरी तैयार करने और रोपा लगाने मे मदद मिली है। अगले माह से हम डबरी में मछली का बीज छोड़ेंगे जिससे आने वाले साल से हमारे लिए कमाई का एक और माध्यम बन जाएगा।

लगभग 10 करोड़ से 395 कार्य पूर्ण
जिला पंचायत कोरिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री योगेन्द्र श्रीवास ने बताया कि जिले के दोनों जनपद पंचायतों को मिलाकर दो वर्षों में 395 आजीविका डबरी का कार्य पूर्ण करा लिया गया है। बीते दो वर्षों में जल संसाधन तैयार करने के लिए डबरी के कार्यों में लगभग दस करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए हैं, इससे पंजीकृत श्रमिकों को प्रति डबरी औसतन ढाई सौ मानव दिवस का रोजगार करने से मजदूरी के रूप में सीधे आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ है।

पोषण संग आय का नया जरिया
कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने बताया कि जिले में आजीविका डबरियों से किसानों के खेतों में सिंचाई की सुविधा के साथ उनके लिए मछलीपालन एक अतिरिक्त स्वरोजगार का अवसर प्रदान करेगा। मछलियों को खाद्य सामग्री के तौर पर इस्तेमाल से ग्रामीण परिवारों में सुपोषण का स्तर सुधरेगा। आजीविका डबरी ग्रामीण जनजीवन के लिए बहुपयोगी जलसंसाधन साबित होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here