कोरिया, 30 जुलाई 2026/ “मोर गांव मोर पानी महाभियान” के तहत कोरिया जिले में बनी लगभग पचास हजार से ज्यादा संरचनाएं पूरे मानसून के दौरान 47 करोड़ लीटर से भी कहीं ज्यादा वर्षाजल को सीधे भूमिगत करेंगी। केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार कोरिया जिला विशेष तौर पर जलसंरक्षण के लिए चिन्हित क्षेत्र में आता है यानी यहां जल संरक्षण के किए गए प्रयास से पूरे प्रदेश में भूजल संवर्धन की अपार संभावनाएं हैं। इस दृष्टिकोण से जल संरक्षण की दिशा में किया गया यह समेकित प्रयास आने वाले वर्षों में पूरे क्षेत्र के भूजल स्तर को सुधारते हुए पूरे पर्यावरण की स्थिति को सुदृढ़ करेगा।

37 हजार से अधिक कंटूर ट्रेंच
कोरिया जिले में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत पूर्व में मनरेगा तथा वर्तमान में विकसित भारत जीरामजी योजना के अंतर्गत अब तक कुल 37 हजार से ज्यादा कंटूर टेंªच बनाए गए हैं। बैकुण्ठपुर जनपद पंचायत अंतर्गत 34 हजार 944 तथा सोनहत क्षेत्र में कुल 2 हजार 440 कंटूर बनाए गए हैं। इसकी लंबाई 9 फिट और चैडा़ई तथा गहराई दो फिट रखी जाती है। इस प्रकार एक संरचना में एक बार बारिश से 1080 लीटर वर्षा जल का संचय होता है। अधिकतम चैबीस घण्टे में यह जल भूमिगत हो जाता है।
10 हजार से ज्यादा सोख्ता गढढे
प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा जलसंरक्षण के लिए आरंभ किए गए मोर गांव मोर पानी महाभियान के अंतर्गत कोरिया जिले में जनप्रतिनिधियों और पंचायती राज पदाधिकारियों के समेकित प्रयास से जनभागीदारी के तहत 10 हजार से ज्यादा सोख्ता गढढे बनाए गए हैं। लगभग एक मीटर गहरे और उतनी ही गोलाई में बनाए गए प्रत्येक सोख्ता गढढे के माध्यम से एक बार में कम से कम एक हजार लीटर वर्षा जल को भूमिगत करने की क्षमता होती है।

वर्षाजल के भूमिगत होने का तकनीकी आंकलन
जिले में बने कंटूर टेंªच की बात करें तो प्रत्येक संरचना के माध्यम से एक बार में एक हजार 80 लीटर जल रोककर भूमिगत किया जाता है। प्रत्येक कंटूर संरचना पूरे मानसून के दौरान यदि 10 बार भी पूर्णतया भरती है तो एक संरचना के माध्यम से ही 10 हजार लीटर से ज्यादा जल को सीधे भूमिगत किया जाएगा। इस तरह कुल 37 हजार 300 से अधिक संरचनाओं के द्वारा पूरे मानसून के दौरान कम से कम 40 करोड़ लीटर वर्षा जल को सीधे भूमिगत किया जाएगा। वहीं जिले में बनाए गए 10 हजार से ज्यादा सोख्ता गढढों के माध्यम से एक बार में कम से कम 7 हजार क्यूबिक मीटर से ज्यादा जल संचित होगा। पूरे मानसून के दौरान यदि न्यूनतम 10 बार भी मानसून का पानी भूमिगत किया गया तो इस माध्यम से पूरे वर्ष में कम से कम 7 करोड लीटर से ज्यादा वर्षाजल भूमिगत करने में मदद मिलेगी।
जलसंचय के लिए निरंतर प्रयास
कोरिया जिला पंचायत के मुख्यकार्यपालन अधिकारी श्री योगेन्द्र श्रीवास ने बताया कि कंटूर और सोख्ता गढढों के माध्यम से करोड़ो लीटर वर्षा जल को भूमिगत करने का प्रयास किया गया है। वर्षाजल को सहेजने के लिए कलेक्टर कोरिया श्रीमती रोक्तिमा यादव के निर्देशन में जिले में वीबीजीरामजी योजना के तहत निरंतर जलसंरक्षण कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं।

जल ही जीवन है
कलेक्टर कोरिया श्रीमती रोक्तिमा यादव ने दैनिक जीवन में जल की अनिवार्यता बतलाते हुए कहा कि जल संरक्षण की दिशा में हो रहे प्रयासों से हमारी आने वाली पीढ़ी का भविष्य जुड़ा हुआ है। उनहोने जिले में हो रहे प्रयासों से अवगत कराते हुए कहा कि कोरिया में पंचायत एंव ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं के माध्यम से जलसंरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य हो रहे हैं। आम नागरिक भी अपने घरों की छतों पर गिरने वाले वर्षाजल को सहेजने का प्रयास करें तो कोरिया का आने वाला कल हरीतिमा से सुंदर, कृषि के लिए सुरक्षित और भूजल से भरपूर होगा।

