मनेन्द्रगढ़ विकासखंड की महिला किसान ने बेहतर उत्पादन और कम लागत की उम्मीद के साथ अपनाई आधुनिक कृषि तकनीक

एमसीबी बदलते समय के साथ जिले के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को भी अपना रहे हैं। खरीफ सीजन 2026 में विकासखंड मनेन्द्रगढ़ के ग्राम नागपुर की निवासी किसान उर्मिला केवट ने पहली बार अपनी खेती में नैनो डीएपी उर्वरक का उपयोग करने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती के माध्यम से कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। उर्मिला केवट ने बताया कि अब तक वे खेती में पारंपरिक डीएपी और अन्य उर्वरकों का उपयोग करती रही हैं, लेकिन इस वर्ष उन्होंने कृषि विभाग और सहकारी समिति के माध्यम से नैनो डीएपी के बारे में जानकारी प्राप्त की। साथ ही आसपास के किसानों से भी उन्हें इसके सकारात्मक परिणामों के बारे में पता चला। इसी अनुभव से प्रेरित होकर उन्होंने इस बार अपनी धान की फसल में नैनो डीएपी अपनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष उनके आसपास के कई किसानों ने नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग किया था। उन किसानों को फसल की बेहतर बढ़वार और संतोषजनक उत्पादन मिला।

इन्हीं सकारात्मक अनुभवों ने उन्हें भी आधुनिक उर्वरक अपनाने के लिए प्रेरित किया। उर्मिला के अनुसार, नैनो डीएपी की सबसे बड़ी विशेषता इसका आसान उपयोग है। पारंपरिक खाद की भारी बोरियों की तुलना में इसकी छोटी बोतलों को आसानी से खेत तक ले जाया जा सकता है। इससे परिवहन में सुविधा होती है और किसानों का समय व श्रम दोनों बचते हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नैनो डीएपी पौधों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराने में सहायक होता है। इसके संतुलित उपयोग से फसल की वृद्धि बेहतर होती है, उर्वरक की बर्बादी कम होती है और खेती की लागत में भी कमी आती है। राज्य सरकार भी खरीफ 2026 सीजन में किसानों के बीच नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग को बढ़ावा दे रही है तथा सहकारी समितियों के माध्यम से इनकी उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। उर्मिला केवट ने विश्वास जताया कि इस वर्ष नैनो डीएपी के उपयोग से उनकी धान की फसल बेहतर होगी और उत्पादन में वृद्धि होगी। उन्होंने अन्य किसानों से भी नई कृषि तकनीकों को अपनाकर वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने की अपील की। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में किसानों का नैनो उर्वरकों की ओर बढ़ता रुझान इस बात का संकेत है कि अब किसान आधुनिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

