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छत्तीसगढ़,एमसीबी, ’प्रोजेक्ट साक्षम’ से सशक्त होंगी बेटियां: जीवन कौशल, आत्मविश्वास और समानता पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

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एमसीबी छत्तीसगढ़ जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग तथा रूम टू रीड इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में संचालित प्रोजेक्ट ‘साक्षम – शिक्षा, आत्मविश्वास एवं समानता’ के अंतर्गत शुक्रवार को एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय खड़गवां के ऑडिटोरियम में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। वर्ष 2026 से 2029 तक संचालित होने वाली इस तीन वर्षीय परियोजना का उद्देश्य छात्रावासों में निवासरत कक्षा 6वीं से 10वीं तक अध्ययनरत बालिकाओं को जीवन कौशल, आत्मविश्वास, स्व-निर्णय क्षमता तथा लैंगिक समानता के माध्यम से सशक्त बनाना है।


कार्यशाला का शुभारंभ सहायक आयुक्त और ट्रेनर शैलेन्द्र भारद्वाज द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सही निर्णय लेने की योग्यता विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है। प्रोजेक्ट ‘साक्षम’ बालिकाओं को जीवन की व्यक्तिगत, सामाजिक, शैक्षणिक एवं भविष्य से जुड़ी चुनौतियों का आत्मविश्वास और विवेकपूर्ण ढंग से सामना करने के लिए तैयार करेगा।
प्रशिक्षण कार्यशाला में जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर अंतर्गत संचालित प्री-मैट्रिक छात्रावासों की अधीक्षक एवं विभिन्न विकासखंडों के मंडल संयोजक सहभागिता कर रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को किशोरावस्था, जीवन कौशल, लैंगिक समानता, प्रभावी संवाद कौशल, नेतृत्व विकास तथा गतिविधि आधारित शिक्षण एवं फैसिलिटेशन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। समूह चर्चा, सहभागितापूर्ण अभ्यास और विभिन्न शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को छात्रावासों में बालिकाओं के समग्र विकास के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।


परियोजना के अंतर्गत बालिकाओं को आत्मविश्वासी, जागरूक एवं सशक्त बनाते हुए उन्हें कक्षा 10वीं एवं 12वीं की शिक्षा सफलतापूर्वक पूर्ण करने, उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने तथा अपने उज्ज्वल भविष्य के निर्माण की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप जीवन कौशल आधारित शिक्षा को छात्रावास व्यवस्था एवं संस्थागत स्तर पर सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
प्रशिक्षण में विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा इस बात पर विशेष बल दिया गया कि यदि बालिकाओं में आत्मविश्वास, संवाद क्षमता, नेतृत्व कौशल और निर्णय लेने की क्षमता का विकास किया जाए, तो वे न केवल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगी, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त करते हुए समाज और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। यह प्रशिक्षण छात्रावासों में अध्ययनरत बालिकाओं के सर्वांगीण विकास और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक प्रभावी पहल साबित होगा।

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