📍 मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी), छत्तीसगढ़
| विशेष संवाददाता
Nilesh Sony
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत दिनांक 18 जून 2026 को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने चिरमिरी क्षेत्र में SECL और नगर पालिक निगम के खिलाफ जोरदार घेराव प्रदर्शन किया। इस आंदोलन ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि कोल प्रबंधन तंत्र को भी सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया।
कार्यक्रम में पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम, प्रदेश अध्यक्ष संजय कमरों, जिला अध्यक्ष केबल सिंह सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल रहे।
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श्रमिकों के मुद्दे पर उग्र आंदोलन
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने SECL में कार्यरत ठेका श्रमिकों के शोषण को लेकर गंभीर सवाल उठाए। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार के कोल मंत्रालय द्वारा वर्ष 2024 में निर्धारित मजदूरी दर
(₹1242 से ₹1334 प्रतिदिन) के बावजूद मजदूरों को मात्र ₹350 से ₹450 तक भुगतान किया जा रहा है।

इसके साथ ही—
8 घंटे की जगह 10–12 घंटे कार्य लिया जा रहा है
मेडिकल सुविधा का अभाव
आवास, बिजली-पानी की कोई व्यवस्था नहीं
20 लाख दुर्घटना बीमा और 30 लाख सेवानिवृत्ति पैकेज की मांग
पार्टी ने इसे “आर्थिक शोषण का संगठित मॉडल” बताया।
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सुरक्षा और कोल परिवहन पर भी सवाल
चिरमिरी क्षेत्र की खदानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर भी गंभीर चिंता जताई गई। पूर्व में हुई दुर्घटनाओं का हवाला देते हुए पार्टी ने कहा कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो बड़ी जनहानि हो सकती है।
साथ ही—
ओवरलोड कोयला परिवहन
बिना ढंके वाहन
बंद खदानों का समतलीकरण न होना
इन सभी मुद्दों को शहर के भविष्य के लिए खतरनाक बताया गया।
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नगर निगम भी निशाने पर
नगर पालिक निगम चिरमिरी में 4 माह से मजदूरों को वेतन न मिलने, पेयजल, सफाई, स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत समस्याओं को लेकर भी प्रदर्शन किया गया।
एक अधिकारी द्वारा “चिरमिरी के DNA” पर दिए गए विवादित बयान की भी कड़ी निंदा की गई।
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16 सूत्रीय और 13 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा
पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने SECL प्रबंधन को 16 सूत्रीय तथा तहसीलदार के माध्यम से नगर निगम को 13 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम ने प्रशासन को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया।
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🔥 श्याम सिंह मरकाम की सख्त चेतावनी
राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम ने अपने तीखे राजनीतिक तेवर दिखाते हुए कहा—
> “आज हम समझाने आए हैं, अगली बार दाना-पानी लेकर आएंगे… हम बाहर रहेंगे और आप अंदर रहेंगे।”
उनका यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी अब केवल ज्ञापन तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि निर्णायक आंदोलन की राह पर है।
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राजनीतिक विश्लेषण: उभरती ताकत के रूप में GGP
इस आंदोलन ने यह साबित कर दिया है कि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी अब केवल क्षेत्रीय संगठन नहीं, बल्कि आदिवासी और श्रमिक मुद्दों पर मजबूत राजनीतिक दबाव बनाने वाली शक्ति बन चुकी है।
विशेष रूप से श्याम सिंह मरकाम का आक्रामक रुख उनके राजनीतिक कद को लगातार ऊंचाई दे रहा है।
मरकाम की जमीनी पकड़ मजबूत हो रही है
श्रमिक और आदिवासी वर्ग में प्रभाव बढ़ रहा है
भविष्य में यह आंदोलन बड़े राजनीतिक बदलाव की भूमिका बन सकता है
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कार्यक्रम को सफल बनाने वाले प्रमुख कार्यकर्ता
इस आंदोलन में शशि राज सिंह, सुक्खू राम ध्रुव, शाकिर अली, नंद कुमार आयाम, चिंटू जैन, भीम कुमार, मो. हुसैन, भूपत यादव, करण इनायती, सत्ते लाल सोनी सहित अनेक कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा।
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चिरमिरी का यह आंदोलन सिर्फ स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में श्रमिक अधिकारों और आदिवासी अस्मिता की नई राजनीतिक धारा को जन्म देता दिख रहा है। आने वाले 15 दिन प्रशासन और सरकार के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।

