/कोरिया
(विशेष रिपोर्ट) नीलेश सोनी
देश में वन संपदा की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में वन विभाग की सुरक्षित नर्सरी से बहुमूल्य चंदन के पेड़ों की चोरी का मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
बताया जा रहा है कि जिन चंदन वृक्षों को सुरक्षा के लिए विशेष फेंसिंग और निगरानी में रखा गया था, वही पेड़ रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। हैरानी की बात यह है कि घटना विभाग के मुख्यालय परिसर के भीतर हुई, जहां सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बताया जाता रहा है।
—
🔍 “कागजों में सुरक्षा, जमीन पर लापरवाही”
सूत्रों के अनुसार, नर्सरी में चंदन के पेड़ों की सुरक्षा को लेकर बड़े दावे किए गए थे, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। मौके पर लगे संकेत बोर्ड और रिकॉर्ड में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त बताई गई है, जबकि जमीन पर पेड़ों के कटे हुए ठूंठ और खाली जगहें साफ नजर आ रही हैं।
इस मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वन विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह गया है?
—
घटना के बाद विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि लापरवाही या मिलीभगत के चलते यह चोरी संभव हो पाई।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सुरक्षित माने जाने वाले परिसर से ही चंदन के पेड़ गायब हो सकते हैं, तो खुले जंगलों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
—
जांच और कार्रवाई की मांग तेज
मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि चंदन जैसे कीमती पेड़ों की चोरी केवल स्थानीय स्तर की घटना नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा भी हो सकती है।
—
यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनता जा रहा है। पर्यावरणविदों और नीति विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वन विभाग की निगरानी व्यवस्था में इस तरह की खामियां हैं, तो देश की जैविक संपदा पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है।
—
कोरिया का यह मामला सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में वन सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविकता को उजागर करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और क्या दोषियों तक पहुंच पाता है या नहीं।

