छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में 27 अप्रैल को एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है,यह प्रस्ताव महिला आरक्षण कानून और डीलिमिटेशन से जुड़े 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने के विरोध में लाया जा रहा है।
ख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 19 अप्रैल को रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि वे “दुखी मन” से मीडिया के सामने आए हैं,मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में पंचायती राज व्यवस्था के तहत महिलाओं को लगभग 57 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है,

जबकि विधानसभा में भी 21-22 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व है। उनका कहना था कि यह दिखाता है कि राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण को लेकर गंभीर है और जमीनी स्तर पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस तरह की राजनीति से देश और समाज दोनों को नुकसान पहुंचता है। साय ने यह भी कहा कि आने वाले समय में जनता इन मुद्दों पर अपना फैसला जरूर देगी और इंडी गठबंधन को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के बयान का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं के अधिकारों को लेकर प्रतिबद्ध है और उनकी उम्मीदों को टूटने नहीं दिया जाएगा।

