📍 विशेष राष्ट्रीय रिपोर्ट |
निलेश सोनी…..
छत्तीसगढ़ के गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान, वन परिक्षेत्र सोनहत और देवगढ़ से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है,
जहां इन दिनों महुआ बीनने के नाम पर जंगलों में धड़ल्ले से आग लगाई जा रही है।

इस लापरवाही और अनियंत्रित गतिविधि ने पूरे वन क्षेत्र की पारिस्थितिकी को गहरे संकट में डाल दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, महुआ संग्रह को आसान बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर जंगलों में आग लगा दी जाती है, जिससे सूखी पत्तियां साफ हो जाएं और महुआ आसानी से दिख सके।
लेकिन यह आग अब नियंत्रण से बाहर होकर विकराल रूप ले चुकी है। इसका खामियाजा सैकड़ों हेक्टेयर वन क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा है।




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🔥 200 हेक्टेयर में लगाए गए पौधे भी हुए खाक
वन विभाग द्वारा कैंपा (CAMPA) योजना के तहत लगभग 200 हेक्टेयर क्षेत्र में लगाए गए नए पौधे भी इस आग की भेंट चढ़ चुके हैं।
जहां एक ओर करोड़ों रुपये खर्च कर हरियाली बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर यह आग उन सभी प्रयासों को राख में तब्दील कर रही है।
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🌳 पुराने वृक्ष भी नहीं बचे, भविष्य पर संकट
स्थिति इतनी भयावह है कि वर्षों पुराने वृक्ष भी जलकर नष्ट हो रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब बड़े-बड़े पेड़ ही सुरक्षित नहीं हैं,
तो नए पौधों का भविष्य क्या होगा? इस आग ने वन पुनर्जनन की पूरी प्रक्रिया को झटका दिया है।
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🐾 वन्य जीवों पर मंडरा रहा खतरा
जंगलों में लगी इस आग से वन्य जीवों का जीवन भी संकट में आ गया है।
तेंदुआ, चीतल, भालू सहित कई जीव अपने प्राकृतिक आवास से विस्थापित हो रहे हैं।
आग के कारण न केवल उनका आश्रय खत्म हो रहा है, बल्कि भोजन और पानी की भी भारी कमी उत्पन्न हो रही है।
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🌿 जड़ी-बूटियों का भी हो रहा विनाश
यह क्षेत्र औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों के लिए भी जाना जाता है,
लेकिन आग की वजह से ये अमूल्य वन संपदा भी जलकर नष्ट हो रही है। इससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है।
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❗ वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल
लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद वन विभाग द्वारा ठोस कार्रवाई न किए जाने से स्थानीय लोगों में आक्रोश है।
सवाल उठता है कि:
क्या वन विभाग इस गंभीर स्थिति से अनजान है?
क्यों नहीं हो रही निगरानी और रोकथाम की प्रभावी व्यवस्था?
आखिर कब तक यूं ही जलते रहेंगे जंगल?
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🛑 तत्काल कार्रवाई की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से मांग की है कि:
जंगलों में आग लगाने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो
फायर लाइन और निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाए
वन सुरक्षा के लिए विशेष अभियान चलाया जाए
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अगर समय रहते इस गंभीर समस्या पर काबू नहीं पाया गया, तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र बंजर भूमि में तब्दील हो सकता है।
यह सिर्फ एक स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पर्यावरण सुरक्षा का सवाल बन चुका है।

