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“कैलाशपुर रेशम केंद्र में रेशम विभाग अधिकारियों की अनुपस्थिति से उजड़ा हरियाली और रोजगार का केंद्र”, विभागीय लापरवाही पर उठे बड़े सवाल”…….

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📍 सोनहत/कैलाशपुर से विशेष रिपोर्ट नीलेश सोनी……

कभी हरियाली, उत्पादन और ग्रामीण रोजगार का केंद्र रहा कैलाशपुर का रेशम विभागीय उद्यान आज बदहाली और उपेक्षा का प्रतीक बन चुका है।

रेशम विभाग द्वारा स्थापित यह केंद्र, जो पहले प्रशिक्षण, उत्पादन और सामाजिक आयोजनों का प्रमुख स्थल हुआ करता था, अब वीरान और जर्जर अवस्था में खड़ा है।

ग्रामीणों के अनुसार, “एक समय था जब यहां हरियाली छाई रहती थी, विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होते थे और लोगों को रोजगार के अवसर मिलते थे।

लेकिन अब स्थिति यह है कि पूरा परिसर सुनसान पड़ा है और भवन खंडहर में तब्दील हो चुके हैं।”

⚠️ मुख्य समस्या क्या है?

अधिकारियों की लगातार अनुपस्थिति

कर्मचारियों की भारी कमी

रखरखाव और निगरानी का पूर्ण अभाव

सरकारी योजनाओं का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन शून्य

📉 विकास का सफर
रेशम केंद्र का उद्देश्य था ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाना और रेशम उत्पादन को बढ़ावा देना,

 

लेकिन विभागीय लापरवाही ने इस उद्देश्य को पूरी तरह विफल कर दिया। जहां कभी उत्पादन और प्रशिक्षण होता था, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है।

🗣️ प्रशासन पर सवाल
यह स्थिति सीधे तौर पर प्रशासनिक उदासीनता और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है। सवाल उठता है कि:

क्या विभाग के अधिकारियों ने कभी जमीनी हकीकत का निरीक्षण किया?

करोड़ों की योजनाओं का लाभ आखिर कहां जा रहा है?

क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या मामला यूं ही दबा दिया जाएगा?

मांग ?
ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

उनका कहना है कि यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यह केंद्र पूरी तरह समाप्त हो जाएगा
सवाल उठता है कि: ?

रेशम विभाग कैलाशपुर

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