निलेष सोनी……
हेडलाइन…
📍 उपशीर्षक:
ग्राम पंचायत सीधी में वन अवरोध नाका के पास पड़ा टैंकर बना लापरवाही की मिसाल, जिम्मेदार कौन?
क्षेत्र में सांसद श्रीमती रीती पाठक द्वारा उपलब्ध कराया गया पानी का टैंकर पिछले लगभग 2 वर्षों से लावारिस हालत में पड़ा हुआ है।
यह टैंकर वन अवरोध नाका के समीप, गौशाला की ओर जाने वाली सड़क के किनारे दक्षिण दिशा में अनुपयोगी स्थिति में पड़ा है, जिससे न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी हो रही है, बल्कि क्षेत्र में पानी जैसी मूलभूत सुविधा से भी ग्रामीण वंचित हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस टैंकर का उपयोग ग्रामीणों के लिए पेयजल आपूर्ति हेतु किया जाना था,
लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों एवं ग्राम पंचायत की उदासीनता के कारण यह योजना धरातल पर फेल साबित हो रही है।


⚖️ प्रशासनिक दृष्टि से गंभीर सवाल:
क्या ग्राम पंचायत ने इस टैंकर के उपयोग हेतु कोई कार्ययोजना बनाई?
क्या संबंधित विभाग
(पीएचई / पंचायत) द्वारा इसकी मॉनिटरिंग की गई?
2 वर्षों से निष्क्रिय पड़े संसाधन पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं?
🏛️ राजनीतिक दृष्टिकोण:
यह मामला सीधे तौर पर जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर भी प्रश्न खड़ा करता है। सांसद निधि से दिए गए संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करना स्थानीय प्रशासन और पंचायत की जिम्मेदारी है।
यदि संसाधन उपयोग में नहीं आ रहे, तो यह जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सत्तापक्ष पर निशाना साध सकते हैं।
📢 ग्रामीणों की मांग:
टैंकर को तत्काल उपयोग में लाया जाए
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो
भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो, इसके लिए निगरानी तंत्र मजबूत किया जाए
1. तत्काल जांच टीम गठित कर स्थिति का मूल्यांकन किया जाए
2. टैंकर को मरम्मत कर उपयोग में लाया जाए या वैकल्पिक उपयोग तय किया जाए
3. दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए
4. पंचायत स्तर पर संपत्तियों की नियमित मॉनिटरिंग अनिवार्य की जाए
5. जनहित योजनाओं की पारदर्शिता हेतु सार्वजनिक सूचना बोर्ड लगाया जाए
🛑 निष्कर्ष:
सरकारी योजनाओं का उद्देश्य जनता को राहत देना होता है, लेकिन जब ऐसे संसाधन वर्षों तक यूं ही पड़े रहें, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि व्यवस्था की विफलता का प्रमाण बन जाता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक संज्ञान लेकर ठोस कार्रवाई करता है।

