निलेष सोनी……..
ब्रेकिंग न्यूज़ | कोरिया ज़िला
नांचल क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था बदहाल?
कोरिया ज़िले के रामगढ़, सोनहत, बंशीपुर उज्ञाव सहित अनेक वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था लंबे समय से गंभीर संकट से जूझ रही है। ?
कई शासकीय विद्यालय आज भी एकल शिक्षक के सहारे संचालित हो रहे हैं, ?
जिससे बच्चों की पढ़ाई, शैक्षणिक गुणवत्ता और भविष्य तीनों पर सीधा प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ?
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर कोरिया की विशेष निगरानी में हाल के दिनों में शिक्षण कार्य में कुछ सुधार अवश्य देखने को मिला है,?
किंतु यह सुधार स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। अस्थायी व्यवस्थाओं और अटैचमेंट के सहारे शिक्षा व्यवस्था को लंबे समय तक नहीं चलाया जा सकता।?
अटैचमेंट संस्कृति पर कठोर सवाल ?
विभागीय सूत्रों के अनुसार कई शिक्षक वर्षों से मूल पदस्थापना छोड़कर अन्यत्र अटैच हैं?
, जबकि दूरस्थ वनांचल विद्यालयों में शिक्षक संकट बना हुआ है। ?
यह स्थिति न केवल प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है, बल्कि बच्चों के संवैधानिक शिक्षा अधिकार पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है। ?

मांग—तत्काल मूल पदस्थापना सुनिश्चित हो ?
स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों और शिक्षा प्रेमियों की स्पष्ट मांग है कि—
सभी अटैच शिक्षकों को तत्काल उनकी मूल पदस्थापना पर भेजा जाए ?
एकल शिक्षक विद्यालयों में अतिरिक्त शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति की जाए ?
वनांचल क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान, गुणवत्तापूर्ण और नियमित शिक्षा मिले
शिक्षा सुधार की मंशा, लेकिन ज़मीनी क्रियान्वयन ज़रूरी
कलेक्टर कोरिया द्वारा शिक्षा को बढ़ावा देने की मंशा सराहनीय है, ?
परंतु सख़्त प्रशासनिक निर्णय और ठोस क्रियान्वयन के बिना यह अभियान अधूरा रहेगा।?
शिक्षा विभाग को अब टालमटोल छोड़कर निर्णायक कदम उठाने होंगे। ?
निष्कर्ष
वनांचल के बच्चों का भविष्य अस्थायी इंतज़ामों का मोहताज नहीं होना चाहिए।?
यदि समय रहते अटैचमेंट समाप्त कर मूल पदस्थापना लागू नहीं की गई, तो यह लापरवाही आने वाली पीढ़ी के जीवन पर भारी पड़ेगी। ?
अब ज़रूरत है कठोर निर्णय, स्पष्ट नीति और ज़मीनी कार्रवाई की
—ताकि शिक्षा वास्तव में विकास का माध्यम बन सके, न कि प्रशासनिक फाइलों की कैद।
जिला शिक्षा अधिकारी
विकासखंड शिक्षा अधिकारी
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