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मनेंद्रगढ़ में रिश्वतखोरी का बड़ा खुलासा: CMO और लेखापाल रंगे हाथ गिरफ्तार, ACB की कार्रवाई से मचा हड़कंप……….

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निलेष सोनी……

मनेंद्रगढ़। नगर पालिका परिषद मनेंद्रगढ़ में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) और लेखापाल को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

इस कार्रवाई के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आमाखेरवा निवासी चन्द्रमणी वर्मा ने ACB कार्यालय अंबिकापुर में शिकायत दर्ज कराई थी।

उन्होंने बताया कि वे “साई कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर” के नाम से नगर पालिका परिषद मनेंद्रगढ़ में निर्माण कार्य कर रहे थे। उनके द्वारा वार्ड क्रमांक 11 में रिटेनिंग वॉल और वार्ड क्रमांक 8 में सीसी सड़क का निर्माण किया गया था, जिसकी कुल भुगतान राशि लगभग 5.90 लाख रुपये थी।

9% कमीशन की मांग, भुगतान रोका गया

शिकायत में आरोप लगाया गया कि भुगतान जारी करने के एवज में CMO इशहाक खान और प्रभारी लेखापाल (सहायक राजस्व निरीक्षक) सुशील कुमार द्वारा 9 प्रतिशत कमीशन, यानी लगभग 53,000 रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी।

रिश्वत नहीं देने पर बिल का भुगतान रोक दिया गया, जिससे शिकायतकर्ता पर आर्थिक दबाव बढ़ गया।

ट्रैप कार्रवाई: पहले 20 हजार, फिर 33 हजार में गिरफ्तारी

ACB ने शिकायत का सत्यापन किया, जिसमें प्रारंभिक रूप से 20,000 रुपये की रिश्वत लेने की पुष्टि हुई।

इसके बाद 23 मार्च 2026 को योजनाबद्ध ट्रैप कार्रवाई की गई। इस दौरान दोनों आरोपी अधिकारियों को 33,000 रुपये की शेष रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज

दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 और 12 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

प्रशासन पर उठे बड़े सवाल

इस घटना के सामने आने के बाद नगर पालिका परिषद मनेंद्रगढ़ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। क्या यह मामला केवल दो अधिकारियों तक सीमित है,

या फिर इसके पीछे कोई बड़ा भ्रष्टाचार नेटवर्क काम कर रहा है? स्थानीय लोगों में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग तेज हो गई है।

क्या बदलेगा सिस्टम?

ACB की इस सख्त कार्रवाई ने यह संदेश जरूर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी है।

लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या इस तरह की कार्रवाइयों से सिस्टम में वास्तविक सुधार आएगा, या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा।

अंतिम सवाल:
क्या यह गिरफ्तारी भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मिसाल बनेगी, या फिर व्यवस्था की जड़ें इतनी गहरी हैं कि बदलाव केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा?

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