हमारे हिन्दुस्तान में सैकड़ो पत्रकार पैदा हो रहे है यह पत्रकार वास्तव में जानकारी कुछ होती है दिखाते कुछ और है। पैसो के बल पर सच्चाई को छुपाया जा रहा है कुछ सोशल मीडिया समाचार पत्रों द्वारा कमीशन को लेकर अधिकारियों से चापलूसी करते है। आज भारत में चापलूसी करने वाले ही आगे बढ़ रहे है क्योंकि रंगीन चादर को सफेद चादर से ढका जा रहा है इससे देश का भविष्य अंधकार में है क्योंकि आज देश में मीडिया एक व्यापार बन कर रह गया है। जैसे लोगों के पास कार्य नही ंहोता है तो वह व्यक्ति मीडिया के नाम पर वसूली का काम चालू करने लग जाता है। आज मीडिया ही हिन्दुस्तान को धराशाही की स्तर पर पहुंचा गया है। जैसे राजनीति नेता सेवक बनकर एक-ढेड साल में करोडों के मालिक बन जाते है यह सेवक हैं या लूटेरे ?
सोचने वाली बात है कि, हिन्दुस्तान में प्रिंट मीडिया का सर्वप्रथम स्थान है पर नई पीढी के पत्रकारों ने इसे व्यापार व देश शोषण का बिजनेस बना लिया है। आज किसी भी पार्टी का नेता हो पर उसके पास में चापलूसी व दलाल अवश्य दिखेंगे। इससे देश का क्या उत्थान होगा ? या देश गड्ढे में जायेगा। जो विद्ववान पत्रकारिता की छवि को नई पीढ़ी के पत्रकार धुमिल करने में लगे हुए है। असली पत्रकारिता की पहचान यह है कि, उसको अपना परिचय देने की जरूरत नहीं पड़ती। पर सोचने वाली बात है कि, इस्लाम धर्म के लोग लगभग 80 प्रतिशत पत्रकारिता में जुड़े हुए है। क्योंकि मुर्गा, दारू, सब्जी बेचने वाले ही पत्रकार बनकर पत्रकारिता की छवि को धुमिल कर रहे है। भारत सरकार मीडिया वालों को कोई सुविधा दे दे तो हर परिवार में 6-7 लोग पत्रकारिता में जुड़ जायेंगे। अभी मादक पदार्थ व हत्याऐं बढ़ गई है। कुछ पत्रकार जिनका जिला बदर हो चुका है। वह सजा आपदा की श्रेणी में आते है। ऐसे एक नहीं लाखों लोग पाये जा सकते है। ऐसा मालूम पड़ता है पत्रकारिता का चैथा स्तभ ध्वस्त हो चुका है। पत्रकार बोलने को एक शब्द है पर पत्रकारिता के नाम पर ऐसे लाखों संगठन पैदा हो चुके है केवल अधिकारियों को धमकाने व चमकाने के लिए गठन बनाया गया है। भारत सरकार से मांग की जाती है कि, योग्यता व अपराधि किस्म के लोगों को संरक्षण न दें। जिससे एक घर में पत्रकार जो कि पत्रकारिता का जिन्हें ज्ञान तक नहीं वह सैकड़ों पैदा हो जायेंगे।



