Home मीडिया पत्रकारिता और सूचना का अधिकार बना एक व्यापारिक परिप्रेक्ष्य ?………….

पत्रकारिता और सूचना का अधिकार बना एक व्यापारिक परिप्रेक्ष्य ?………….

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आज के दौर में लोग जगह-जगह व्हाट्सएप, फेसबुक व पोर्टल के माध्यम से जो चाहे न्यूज लगा व दिखा रहे है। जानकार सूत्र बताते है कि, कुछ लोग खुद को पत्रकार और अधिवक्ता बताकर अपराधी प्रवृत्ति के हो गए हैं और करोड़ों रुपये की वसूली में शामिल हैं। इन पर गांजा, शराब और मारपीट जैसे कई अपराधिक मामले दर्ज हो चुके होते हैं। परंतु आरटीआई के माध्यम से करोड़ों रुपये की वसूली का मामला उजागर होने से यह साफ हो गया है कि ये लोग अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। यहां तक कि, इनके पास इतना पैसा आ रहा है कि, पैसा देकर सम्मानित हो रहे है।

मिली जानकारी के अनुसार, कुछ लोग पोर्टल पत्रकार बनकर फर्जी खबरें फैलाते हैं और मोटी रकम वसूलते हैं। जांच में पता चलता है कि इनमें से कुछ मध्य प्रदेश से भागे हुए अपराधी हैं जो पत्रकारिता की आड़ में लाभ उठा रहे हैं। इसके अलावा कुछ लोग फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र बनवाकर उसका लाभ उठाते हैं। यह हैरानी की बात है कि जो व्यक्ति आंखों से नहीं देख सकता, वह कार कैसे चला सकता है, जबकि कार्यालय में इसके प्रमाण मौजूद हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आजकल कुछ पोर्टल चैनल के पत्रकार मंत्री और अधिकारियों के खिलाफ फर्जी खबरें फैलाकर करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। ये लोग सूचना के अधिकार का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और पोर्टल के नाम पर समाचार पत्र प्रकाशित कर रहे हैं। यहां तक कि, राष्ट्रीय त्योहारों पर भी फर्जी विज्ञापन छापे जा रहे हैं जिनमें संपादक और मुद्रक का पता नहीं होता है। यह प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। ऐसे में फर्जी खबरें फैलाने से विश्वसनीयता कम होती है और समाज में भ्रम फैलता है। और कुछ पत्रकार अपने फायदे के लिए खबरें लिखते हैं, न कि जनहित के लिए। वहीं पत्रकारों के लिए प्रशिक्षण और शिक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि वे अपने काम को बेहतर ढंग से कर सकें। परंतु नई पीढ़ी के पत्रकार ढंग से पढ़ना व लिखना भी नहीं जानते, और पत्रकारिता के नाम से धौस जमाते रहते है। ऐसी प्रषासन की लापरवाही देखने को मिल रही है।

भारत सरकार को फेक न्यूज और अपराध को बढ़ावा देने वाले पोर्टल्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। यहां तक कि, व्हाट्सएप और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग करने वाले असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए। क्योंकि फेक न्यूज और अपराध को बढ़ावा देने वाले पोर्टल्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स समाज के लिए खतरनाक हो सकते हैं। एवं लोगों को जागरूक करना चाहिए ताकि वे फेक न्यूज और अपराध को पहचान सकें और उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकें।

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