बैकुण्ठपुर मुख्यालय में कलेक्टर महोदया जी के देख-रेख में भ्रटाचार देखने को मिलना एक आश्चर्यजनक बात है। जो कि आवेदक सैकड़ो बार शिकायत करते-करते थक चुके है, पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुआ। क्या शिकायत कलेक्टर महोदया जी तक नहीं पहुंच रही या कुछ और बात है ?
बता दें कि, नाली निर्माण व रोड निर्माण को लेकर सुशासन तिहार से संबंधित लिखित में शिकायत नगर पालिका को दिया गया। परंतु कोई कार्यवाही नहीं हुआ। बड़ी सोचने वाली बात है कि, बैकुण्ठपुर राजस्व विभाग में आवेदक के द्वारा शिकायत पर एसडीएम महोदया ने स्टे दिया। जानकार सूत्र बताते है कि, पैसे के बल व दबाव पर आवेदक को इस बारे में पता ही नहीं चला और जांच के दौरान अनावेदक जो कि 17 लोगों ने तालाब को खरीद लिया है। वहीं प्रभाकर डबरे से आवेदक का लगभग 30 वर्षों से विवाद चल रहा है इसके चलते उन सभी ने पंचनामा पर फर्जी जांच करा लिया है, जबकि आवेदक का जांच में कोई भी किसी प्रकार का हस्ताक्षर नहीं है तो जांच कैसी ? बताया जाता है कि, अनावेदक करोड़ो का आसामी है इसलिए पैसे के बल पर स्टे हटवा दिया और राजस्व विभाग ने आवेदक को कोई भी जानकारी नहीं दिया। इससे साबित होता है कि, पद का दूरूपयोग किया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, एक मामला ऐसा भी है जो कि न तो उस व्यक्ति का कोरिया जिले में जन्म हुआ है, न ही कोरिया जिले में रहा है, पर पैसे के बल पर राजस्व विभाग के पटवारी द्वारा किसके आधार पर व किसके आदेश पर वंश वृक्ष बनवा लिया गया ? यह भी लोगों में चर्चा है कि, फर्जी काम के लिए आरआई व पटवारी का सबसे बड़ा महत्व होता है जिसका हमारे राजस्व विभाग में उनका उल्लेख है। वहीं लोगों का कहना है कि, भ्रष्टाचार करना हमेशा से आरआई व पटवारियों का रिकाॅर्ड रहा है इनका तो बिना पैसे के कोई भी काम नहीं होता। बताया जाता है कि, राजस्व विभाग के कार्यकलापों को कलेक्टर महोदया भी पर्दा डाल रही है सोचने वाली बात है कि, स्टे किसके आदेश पर लगा ? और आवेदक को जानकारी क्यों नहीं दिया गया ? जानकार सूत्र बताते है कि, जांच के दौरान अनावेदक ने लगभग 5 लाख रूपये खर्च किया, जिसके बाद जांच प्रभावित हुआ।
वहीं राजस्व विभाग इतना बड़ा धोखा दे सकता है, यह इस बात पर देखा जा सकता है कि, आवेदक के बिना ही जांच कर दिया गया। इतना बड़ा धोखेबाज और क्या हो सकता है ? कोरिया प्रशासन ऐसे लोगों पर कार्यवाही करें जो कि इतने बड़े-बड़े मामले के आरोप राजस्व विभाग पर लग रहे है। इस संबंध पर माननीय मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री एवं राज्य स्तर पर इसकी जानकारी दिया गया है अब देखना यह है कि, क्या कोरिया प्रशासन इस पर जांच करेगा ?


