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चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना, जानिए महत्व, पूजाविधि और मंत्र………..

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नवरात्रि के सातवें दिन देवी कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व होता है। देवी भागवत पुराण के अनुसार, देवी कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत उग्र और भयावह है, लेकिन वे भक्तों के सभी प्रकार के भय को नष्ट करने वाली हैं। इनकी साधना करने से साधक के जीवन में आने वाली हर बाधा दूर होती है और उसे आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। देवी कालरात्रि दुष्ट आत्माओं, राक्षसों और नकारात्मक शक्तियों का नाश करती हैं, इस कारण उन्हें “शुभंकारी” भी कहा जाता है।

देवी कालरात्रि की पौराणिक महिमा

पौराणिक कथा
देवी कालरात्रि की उत्पत्ति शुम्भ और निशुम्भ नामक दो राक्षसों के वध के लिए हुई थी। इन दोनों राक्षसों ने देवताओं को परेशान कर रखा था और उन्हें पराजित करने के लिए देवी कालरात्रि का अवतार हुआ था।

देवी का रूप
देवी कालरात्रि का रूप बहुत ही भयंकर और आकर्षक है। उनका रंग काला है, और उनके बाल बिखरे हुए हैं। उनके चार हाथ हैं, जिनमें से एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में वर मुद्रा है।

महत्व
देवी कालरात्रि की पूजा करने से व्यक्ति को साहस, शक्ति और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। उनकी पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।

पूजाविधि
देवी कालरात्रि की पूजा करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करना चाहिए:

– देवी की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें।
– देवी को फूल, फल, और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें।
– देवी के मंत्रों का जाप करें।
– देवी की आरती करें।

मंत्र
देवी कालरात्रि के मंत्र निम्नलिखित हैं:

– ॐ कालरात्र्यै नमः
– ॐ कालरात्रि देव्यै नमः
– ॐ कालरात्रि महामाये नमः

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