शुभ मुहूर्त
दुर्गा अष्टमी के दिन पूजन और कन्या पूजन के लिए शुभ मुहूर्त
– पूजन का शुभ मुहूर्त: सुबह 10:00 बजे से 12:00 बजे तक।
– कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 2:00 बजे तक।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
- सूर्योदय : सुबह 6 बजकर 7 मिनट
- सूर्यास्त : शाम 6 बजकर 41 मिनट
चंद्रमा की स्थिति
- चंद्रोदय : दोपहर 11 बजकर 41 मिनट
- चंद्रास्त : देर रात 2 बजकर 19 मिनट
विशेष शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त : तड़के 4 बजकर 35 मिनट से 5 बजकर 21 मिनट तक — ध्यान व जप के लिए श्रेष्ठ समय
- विजय मुहूर्त : दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक — कार्य सिद्धि के लिए श्रेष्ठ समय
- गोधूलि मुहूर्त : शाम 6 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 3 मिनट तक — पूजा और दीपदान के लिए उत्तम
- निशिता मुहूर्त : रात 12 बजकर 1 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक — रात्रि पूजा और साधना के लिए श्रेष्ठ
माता महागौरी पूजा विधि
1. सुबह स्नान: माता महागौरी की पूजा करने से पहले सुबह स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
2. पूजा घर की सफाई: पूजा घर की सफाई करें और माता महागौरी की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें।
3. सामग्री इकट्ठा करना: पूजा के लिए आवश्यक सामग्री इकट्ठा करें, जैसे कि फूल, फल, धूप, दीप, और अन्य पूजा सामग्री।
4. माता महागौरी का आह्वान: माता महागौरी का आह्वान करें और उनकी पूजा शुरू करें।
5. फूल और फल चढ़ाना: माता महागौरी को फूल और फल चढ़ाएं।
6. धूप और दीप जलाना: धूप और दीप जलाएं।
7. मंत्र जाप: माता महागौरी के मंत्रों का जाप करें।
8. आरती: माता महागौरी की आरती करें।
9. प्रसाद वितरण: प्रसाद वितरण करें।
माता महागौरी ध्यान मंत्र
*”ॐ श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥”*
इस मंत्र का जाप करने से माता महागौरी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।
श्री दुर्गा चालीसा
– *”जय दुर्गे जग की सुखदायनी, जय दुर्गे जग की सुखदायनी।
नमो नमो नमो नमो माता, नमो नमो नमो नमो माता॥”*
– *”तुम्हीं हो जग की माता, तुम्हीं हो जग की धाता।
तुम्हीं हो जग की रक्षा, तुम्हीं हो जग की पालना॥”*
– *”तुम्हीं हो असुरों की संहार, तुम्हीं हो देवों की आधार।
तुम्हीं हो जग की शरण, तुम्हीं हो जग की जीवन॥”*
नवरात्रि पारण विधि
1. दशमी तिथि के दिन: नवरात्रि के अंतिम दिन, दशमी तिथि के दिन, पारण किया जाता है।
2. सुबह स्नान: पारण के दिन सुबह स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
3. पूजा घर की सफाई: पूजा घर की सफाई करें और देवी दुर्गा की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें।
4. हवन और पूजा: हवन और पूजा करें, जिसमें देवी दुर्गा को फूल, फल, और अन्य पूजा सामग्री अर्पित की जाती है।
5. कन्या पूजन: कन्या पूजन करें, जिसमें 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को भोजन कराया जाता है और उन्हें उपहार दिए जाते हैं।
6. पारण का समय: पारण का समय नवरात्रि के अंतिम दिन, दशमी तिथि के दिन, सूर्योदय के बाद होता है।
7. पारण के लिए सामग्री: पारण के लिए सामग्री में फल, मिठाई, और अन्य पूजा सामग्री शामिल होती है।
पारण के लाभ
नवरात्रि पारण करने से देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।