कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को देवउठनी या देवप्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं, और इसी दिन से सभी शुभ व मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। इस वर्ष देवउठनी एकादशी का पर्व शनिवार, 1 नवंबर 2025 को मनाया जाएगा।
श्रीहरि पूजा का शुभ मुहूर्त
पूजन तिथि प्रारंभ: 31 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार) रात 10:12 बजे
पूजन तिथि समाप्त: 1 नवंबर 2025 (शनिवार) रात 8:36 बजे
मुख्य पूजा मुहूर्त: 1 नवंबर को सुबह 06:15 बजे से 08:45 बजे तक सर्वश्रेष्ठ समय रहेगा।
इस अवधि में भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का विधिवत पूजन करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।
देवउठनी एकादशी का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार महीने बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इन चार महीनों को “चातुर्मास” कहा जाता है, जिसमें विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही धार्मिक, सामाजिक और शुभ कार्यों का द्वार पुनः खुल जाता है।
इस तरह करें पूजा
1️⃣ सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2️⃣ पूजा स्थल पर श्रीहरि विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
3️⃣ तुलसी दल, फूल, चंदन, धूप और दीप से पूजन करें।
4️⃣ भगवान विष्णु को शंख, चक्र, गदा, पद्म का ध्यान करते हुए जगाने का संकल्प लें।
5️⃣ प्रसाद में पंचामृत, गुड़, तुलसी पत्र और खीर अर्पित करें।
6️⃣ शाम को तुलसी विवाह का आयोजन करने की भी परंपरा है, जिसमें देवी लक्ष्मी और विष्णु जी का प्रतीकात्मक विवाह कराया जाता है।
देवउठनी एकादशी पर करें ये शुभ कार्य — मिलेगा विशेष फल
दान-पुण्य करें, जरूरतमंदों को भोजन व वस्त्र दान दें।
तुलसी के पौधे की पूजा करें — इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
गरीबों को दीपदान करने से विष्णु कृपा और धन की प्राप्ति होती है।
पंडितों का मत
स्थानीय पंडितों के अनुसार — “देवउठनी एकादशी का दिन भगवान श्रीहरि विष्णु के जागरण का प्रतीक है। इस दिन किया गया हर शुभ कार्य करोड़गुना फल देता है। जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु का पूजन करता है, उसे जीवन में स्थायी सुख और शांति प्राप्त होती है।”
देवउठनी एकादशी सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि जीवन में नई शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन श्रीहरि के जागरण के साथ ही घर-परिवार और समाज में भी शुभ कार्यों की रौनक लौट आती है। इसलिए कल सुबह शुभ मुहूर्त में श्रीहरि विष्णु का पूजन जरूर करें और अपनी जीवनयात्रा में समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करें।



