अब क्या कहते हो साहिब?
नरसिंहपुरिया डोज
नरसिंहपुर। नरसिंहपुर जिले में विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद कुछ लोगों की बोलती बंद हो गयी है। जिन्हें सिर्फ अपने अहंकार के चलते उन्हें धरातलीय ज्ञान का आभास हो गया है पर वे हकीकत को मानने के लिये सार्वजनिक तौर पर तैयार नहीं है। जिले में भाजपा को निपटाने के बाद वे कांग्रेश आगामी लोकसभा चुनाव में अपनी संभावनाओं की जमीन तलाशने में जुट गये हैं। भाजपा में बहुत से लोगों को भ्रम था कि वे ही जिले की भाजपा के तारनहार है पर चुनाव परिणामों ने उनके दावों की पोल खोल दी
बनेंगें नये राजनैतिक समीकरण
नरसिंहपुर जिले में कांग्रेस को मिली सफलता ओर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार से जिले में नये राजनैतिक समीकरण बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है वहीं जिले से दो मंत्री बनने की संभावनाओं को बल मिलने लगा है जिस तरह से कांग्रेस को जिले से बढ़त हासिल हुयी है उससे कांग्रेस की जिले में उतनी ही राजनैतिक जबावदेही बढ़ गयी है अवैध रेत,अवैधशराब ओर अपराधिक गतिविधियों पर अंकुश व किसानों की कर्ज माफी के साथ,गन्ना का न्यायोचित मूल्य ओर भुगतान हाल की प्राथमिक समस्या है। इन बातों को अमली जामा पहनाने के लिये नई सरकार के लिये एक तरह से चुनौती होगी। प्रशासनिक सर्जरी ओर नई राजनैतिक सत्ता के केंद्रों को लेकर अभी से लोगों में चर्चा हो रही है। भाजपा में हार के कारणों से उपजी निराशा ओर हताशा से ऊबरने की कवायद हो रही है
ये भी ठीक रहा
नरसिंहपुर जिले में स्थानीय उम्मीदवारों की कसक नरसिंहपुर व गोटेगांव विधानसभा में रही है नरसिंहपुर में गोटेगांव से आने वाले प्रत्याशी ने जीत दर्ज की वहीं गोटेगांव में नरसिंहपुर से आने वाले प्रत्याशी ने चौका मारा है। इस प्रकार क्षेत्र में यह संतोष लोगों को करना पड़ रहा है गोटेगांव का नरङ्क्षसंहपुर में ओर नरसिंहपुर का गोटेगांव में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहा है। इसी बहाने मन को स्थानीयता की तसल्ली लोग एक दूसरे को दे रहे हैं। यह भी अजीब संयोग है जो कसक लोगों के मन होती है उसका मलाल कहीं ना कहीं किसी तरीके से हो जाता है परिणाम के बाद मन को मनाना ही पड़ता है नहीं मनायेंगें तो कोई इसमें कुछ नहीं कर सकता है।
चलते……………….चलते………………….चलते……………….
नरसिंहपुर जिले में चुनाव परिणाम के बाद रायचंदो ओर ज्ञानचंदों की लिस गयी है वे अपने कई सेटों के हिसाब से चुनाव परिणाम की घोषणा की थी उन्हीं सेटों के हिसाब से जिसकों जो बताया था जहां उनकी जानकारी रायचंदी के हिसाब से फॅस गयी है वहां पर जाकर अपना मुँह मीठा करने में जुटे हैं। ल’छू ने पूछा कि सिर्फ मुंह मीठा करने के लिहाज से वे अपना इतना कीमती समय चुनाव में लगाते रहे। मैंने उसे बताया कि रायचंदी एक प्रकार का रोग है भले ही कुछा ना हो पर अपना ज्ञान पटकने में का जो संतोष होता है वह समय की कीमत उसके सामने कुछ भी नहीं है ज्ञानचंदों की तो पौ बारह हो गयी है वे तो इन दिनों मंत्री तक बनाने की ज्ञानचंदी बघार रहें हैं मंत्री किसी को बनना है चिंता इंहें सता रही है?


