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छत्तीसगढ़ में जातीय पक्षपात को लेकर बढ़ी चर्चाएँ—स्वास्थ्य मंत्री पर ‘एक समाज विशेष’ को बढ़ावा देने के आरोप, जनता में नाराज़गी तेज…………

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बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल रहा, लेकिन इसी बीच छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य मंत्री को लेकर जातीय पक्षपात के आरोपों ने नई बहस को जन्म दे दिया है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा व्यापक है कि मंत्री के आसपास मौजूद कई लोग स्वयं को “जायसवाल समाज का रिश्तेदार” बताकर प्रशासनिक स्तर पर प्रभाव का दावा करते हैं, जिससे पूरे समाज व शासन की छवि पर सवाल उठ रहे हैं। इन चर्चाओं ने सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक एक नई बहस पैदा कर दी है— क्या कोई मंत्री संपूर्ण जनता का प्रतिनिधि होता है या केवल किसी एक समाज का?

जनता का आरोप — “जातीय पहचान के नाम पर प्रभाव दिखाने लगे लोग”

स्थानीय लोगों ने बताया कि बीते कुछ समय में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें कुछ लोग— स्वयं को मंत्री का भतीजा, चाचा, भाई या रिश्तेदार बताते हुए अधिकारियों पर दबाव बनाने का प्रयास करते दिखे हैं। लोगों का कहना है कि इससे संदेश जा रहा है कि मंत्री का दायरा “छत्तीसगढ़ की जनता” नहीं बल्कि केवल “जायसवाल समाज” तक सीमित कर दिया गया है।

स्वास्थ्य विभाग में ‘फर्जी नौकरी’ का प्रकरण भी बना चर्चा का कारण

कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि पूर्व में एक युवक—जिसे स्थानीय लोग “प्रिंस जायसवाल” के नाम से जानते हैं—स्वास्थ्य विभाग में कथित रूप से फर्जी तरीकों से नौकरी कर रहा था। यह मामला भी जनता में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग कहते हैं कि— “जब एक ही समाज के लोग रिश्तेदारी का दावा करके लाभ उठा रहे दिखते हैं, तो पूरे शासन की छवि प्रभावित होती है।”

पुलिस विभाग में भी “भतीजा होने का दावा”—वीडियो वायरल होने से बढ़ी नाराज़गी

इसी कड़ी में एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ, जिसमें एक व्यक्ति स्वयं को “मंत्री का भतीजा” बताकर पुलिस विभाग में प्रभाव दिखाता दिखाई देता है। यह वीडियो सामने आने के बाद जनता के बीच नाराज़गी और बढ़ गई। लोग कह रहे हैं कि—

“छत्तीसगढ़ के मंत्री पूरे राज्य के हैं, न कि किसी एक समाज के।
जाति का उपयोग शक्ति प्रदर्शन का साधन नहीं होना चाहिए।”

जनता की चिंता—“जातीय राजनीति का ज़हर न पनपे”

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ समाज में जातिवाद को बढ़ावा देती हैं और सामाजिक सौहार्द पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। लोगों का कहना है— “यह लोकतांत्रिक राज्य है, यहाँ जाति नहीं बल्कि सार्वजनिक सेवा और पारदर्शिता ही मंत्री की पहचान होनी चाहिए।”

मंत्री से जवाबदेही और हस्तक्षेप की मांग

जनता का साफ कहना है कि— यदि कोई व्यक्ति मंत्री का नाम लेकर अपनी मनमानी कर रहा है, या जातीय पहचान के आधार पर प्रभाव दिखा रहा है, तो यह पूरे शासन और मंत्री पद की गरिमा पर प्रश्न खड़ा करता है। लोगों ने मांग की है कि स्वास्थ्य मंत्री स्वयं हस्तक्षेप कर ऐसे मामलों पर स्पष्टता दें और प्रशासन को निर्देशित करें कि
“किसी भी समाज या रिश्तेदारी के नाम पर शक्ति का गलत उपयोग करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।”

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