बैकुण्ठपुर/कोरिया। जनपद बैकुण्ठपुर में पंचायत सचिवों और स्थानीय तंत्र पर सरकारी धन के दुरुपयोग, मनमानी बिलिंग, और निम्नस्तर के विकास कार्यों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों के बीच इन दिनों यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आरोप है कि सचिव—जनपद अध्यक्ष और सीईओ के “सरंक्षण” के नाम पर—शासन की योजनाओं का लाभ उठाने के बजाय सरकारी राशि का गलत उपयोग कर रहे हैं।
फर्जी बिल, मोटी कमाई और आलीशान संपत्ति
ग्रामीण सूत्रों का कहना है कि कई पंचायतों में— फर्जी या अपूर्ण कार्यों के बिल, बिना भौतिक सत्यापन के भुगतान और कागज़ों में पूर्ण दिखाए गए निर्माण के माध्यम से बड़ी धनराशि निकाली जा रही है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कुछ सचिव— कई-कई पंचायतों को संभालते हुए, सरकारी धन का दुरुपयोग करते हुए अपने लिए 10–15 लाख की कारें और कई मंज़िलों के आलीशान मकान बनवा चुके हैं।
चेरवापारा श्मशानघाट का सड़क निर्माण—गुणवत्ता पर सबसे बड़ा सवाल
हाल ही में ग्राम चेरवापारा श्मशानघाट की ओर बनाई गई सड़क ने पूरा मामला और गर्म कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि— सड़क पंचायत द्वारा बनाई गई, लेकिन गुणवत्ता 30% भी सही नहीं, पूरी राशि खर्च दिखा दी गई और सड़क की मोटाई–क्वालिटी कहीं भी मानक के अनुरूप नहीं। ग्रामीणों ने कहा कि जांच की जाए तो असली स्थिति उजागर हो जाएगी और “कौन लाभार्थी है” यह साफ हो जाएगा।
“लोकपाल भी शामिल?”—ग्रामीण सूत्रों की बड़ी आशंका
कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि इन मामलों में लोकपाल स्तर की शिथिलता और मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है। लोगों का कहना है कि— “लोकपाल का पद निगरानी का होना चाहिए, लेकिन यह एक तरह का व्यापार जैसा चल रहा है।”
ग्रामीणों का कहना है कि शासन द्वारा— सरपंच, सचिव और जनपद स्तर के अधिकारियों को मानक वेतन, मानदेय और अधिकार दिए गए हैं ताकि गांवों में पारदर्शी विकास हो सके। लेकिन जब शिकायतों पर भी कोई कार्रवाई न हो, तो आम ग्रामीणों को न्याय कहाँ मिलेगा? ग्रामीनों का कहना है— “जब पूरा सरकारी तंत्र भ्रष्टाचार के बोझ तले दब जाए, तो आम आदमी कहाँ जाए?”
ग्रामीणों की मांग है कि— पंचायतों के सभी विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन, बिल–कागज़ों की ऑडिट जांच, सचिवों की आर्थिक स्थिति और संपत्ति की जाँच और जनपद स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाए। लोगों का कहना है कि यदि इस पूरे मामले की जांच समय रहते नहीं हुई, तो पंचायतों में विकास की जगह भ्रष्टाचार का ही राज चलता रहेगा।


