Home कोरिया बैकुण्ठपुर/कोरिया/CG : स्वास्थ्य विभाग और पत्रकारिता पर सवाल?—कोरिया में प्रभाव, दबाव और...

बैकुण्ठपुर/कोरिया/CG : स्वास्थ्य विभाग और पत्रकारिता पर सवाल?—कोरिया में प्रभाव, दबाव और लाभ उठाने के आरोप, ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग……………

116
0

बैकुण्ठपुर/कोरिया। जिले में पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य विभाग और पत्रकारिता से जुड़े कथित प्रभाव–प्रयोग, पद–दबाव और परिवारिक लाभ लेने को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, कुछ लोग “पत्रकार” होने का दावा कर प्रशासनिक ढांचे और विभागीय प्रक्रियाओं पर अनुचित दबाव बनाकर निजी लाभ अर्जित करने में लगे हुए हैं। इन आरोपों ने न केवल जिले की प्रशासनिक छवि बल्कि पत्रकारिता की प्रतिष्ठा पर भी प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

एक ही परिवार को “डबल लाभ” मिलने पर सवाल—स्थानीय लोगों ने उठाई आवाज

ग्रामीणों का कहना है कि जिन विभागों में सरकारी नियम एक ही परिवार को दोहरी लाभ सुविधा देने से रोकते हैं, वहीं कुछ लोग पत्रकारिता की पहचान और “संगठन” के प्रभाव का उपयोग कर अपने परिवार के लोगों को विभिन्न विभागों में नौकरी दिलाने का प्रयास करते हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि— संगठन बनाकर अधिकारी–कर्मचारियों पर दबाव बनाया जाता है, पत्रकार का बोर्ड व स्टीकर लगाकर मनमानी की जाती है, कार पर ‘PRESS’ लिखवाकर विभागों में प्रभाव दिखाया जाता है।

एसईसीएल क्वार्टर और जमीन पर कब्जे जैसे आरोप भी चर्चा में

कुछ ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि कुछ व्यक्तियों ने पत्रकारिता की पहचान का उपयोग कर—एसईसीएल के क्वार्टरों में अवैध रूप से रहने, एसईसीएल की जमीनों पर कब्जा करने, बिना पात्रता के बिजली-पानी का लाभ उठाने जैसी गतिविधियों में संलिप्त होने की बातें सामने आई हैं। लोगों का कहना है कि ऐसे मामले “जांच योग्य” हैं और प्रशासन को इन तथ्यों की तत्काल पुष्टि करनी चाहिए।

“प्रेस” का दुरुपयोग?—माइक आईडी और पोर्टल कार्ड दिखाकर वसूली की शिकायत

कुछ नागरिकों ने यह भी आरोप लगाए कि कुछ लोग— माइक की आईडी, पोर्टल कार्ड, वाहन पर प्रेस बोर्ड का उपयोग कर व्यापारियों और स्थानीय लोगों से धन उगाही करते हैं, और जो व्यक्ति सहयोग न करे, उसके खिलाफ नकारात्मक समाचार प्रकाशित कर दिए जाते हैं।

“नशे में पत्रकारिता”—गंभीर आरोपों से पेशे की साख पर सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोग नशे की हालत में अभद्र व्यवहार कर सोशल मीडिया या पोर्टल पर उल्टे-सीधे और बेबुनियाद समाचार प्रकाशित करते हैं, जिससे जिले में भ्रम और अशांति फैलती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आचरण पत्रकारिता की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।

पत्रकारिता का दुरुपयोग?

ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों में यह भी शामिल है कि— कुछ लोग कार पर ‘PRESS’ लिखकर सब्जी का व्यापार करते हैं, बिना किसी प्रमाणिक अखबार या मान्य मीडिया संस्था से जुड़े होने के बावजूद 15 अगस्त और 26 जनवरी पर सरकारी विज्ञापन लेते हैं और इन सब गतिविधियों पर कोई निगरानी नहीं है।

लोगों ने कहा कि सभी दस्तावेज, आवेदन और शिकायतें संबंधित कार्यालयों में उपलब्ध हैं, इसलिए शासन को चाहिए कि— स्वास्थ्य विभाग, मीडिया पहचान पत्र, आवास उपयोग, जमीन कब्जा, और सरकारी विज्ञापन वितरण जैसे मुद्दों पर निष्पक्ष और खुली जांच कराए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इन मुद्दों की जांच नहीं हुई, तो “पत्रकारिता और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों की साख पर गंभीर असर पड़ेगा।”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here