कोरिया। कसरा ग्राम पंचायत में विकास कार्यों को लेकर सामने आ रही अनियमितताओं ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। पंचायत में जिन कार्यों के लिए लाखों रुपये स्वीकृत किए गए थे, वे धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रहे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन कार्यों के लिए स्वीकृत राशि का लगभग 40 प्रतिशत तक आहरण पहले ही कर लिया गया, जबकि न तो निर्माण शुरू हुआ है और न ही सामग्री तक पहुंचाई गई। ग्रामीणों की लगातार शिकायतों और मीडिया रिपोर्टों के बावजूद पंचायत सचिव सहित जिम्मेदारों पर अब तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई, जिससे लोगों में गहरा आक्रोश है और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट: जिन कामों को पूरा बताया गया, वे अस्तित्वहीन
मौके पर निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि जिन कार्यों को दस्तावेजों में पूरा दिखाकर राशि निकाली गई है, उनका कोई अस्तित्व ही नहीं है। ग्रामीणों, पंच और सरपंच का आरोप है कि पंचायत में पारदर्शिता पूरी तरह खत्म हो चुकी है। बिना किसी वास्तविक प्रगति के, सचिव द्वारा बिल लगाकर राशि उठाए जाने की बात सामने आई है।
जीएसटी चोरी के आरोप भी उजागर
ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के साथ-साथ जीएसटी चोरी के भी गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि—आपूर्ति व सामग्री खरीद के बिलों में जीएसटी काटा गया, लेकिन टैक्स को जमा नहीं किया गया, जिससे लाखों रुपये की टैक्स चोरी की आशंका जताई जा रही है। लोगों का सवाल है—“क्या यह सब जिम्मेदार अधिकारियों की मौन स्वीकृति से हो रहा है?”
शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं—ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी प्रशासन कार्रवाई से बचता दिख रहा है।
इससे भ्रष्टाचारियों के हौसले और बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो पंचायत में भ्रष्टाचार और ज्यादा बढ़ेगा।
ग्रामीणों ने विकासखंड से लेकर जिला प्रशासन तक पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और सभी कार्यस्थलों के भौतिक सत्यापन की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
पंचायत राज व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह
कसरा पंचायत की यह स्थिति पंचायत व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल खड़ा करती है।
जब बिना काम किए भारी रकम निकाल ली जाती है और कार्रवाई नहीं होती, तो शासन की योजनाओं पर लोगों का भरोसा डोलने लगता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि भ्रष्टाचार की इस कड़ी पर रोक लगे और पंचायत में वास्तविक विकास कार्य शुरू हो सकें।


