अंबिकापुर मुख्यालय का मेडिकल कॉलेज अस्पताल इन दिनों अव्यवस्थाओं का केंद्र बन गया है। हालात इतने खराब हैं कि स्थानीय लोगों के बीच इसे “चिकित्सालय नहीं, शवगृह” कहा जाने लगा है। मरीजों को मूलभूत सुविधाएँ तक नहीं मिल पा रही हैं, और डॉक्टरों की कथित लापरवाही से मरीजों की स्थिति और बिगड़ रही है। सरकार के बड़े–बड़े भाषणों और वादों के बावजूद स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाली की कगार पर है। लोगों का कहना है कि व्यवस्थाएँ “शून्य” होकर रह गई हैं।
बैकुण्ठपुर में भी हालात गंभीर — अनुभवहीन डॉक्टरों पर सवाल
बैकुण्ठपुर अस्पताल में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अस्पतालों में अनुभवहीन डॉक्टर तैनात किए जा रहे हैं, जिससे मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। वहीं, कुछ खास वर्गों का प्रभाव होने की भी बातें सामने आती रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग में अव्यवस्था के आरोप, जनता परेशान
सामाजिक मीडिया पर स्वास्थ्य मंत्री और विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि प्रचार तो बहुत किया जाता है, लेकिन वास्तविक कार्य पर नज़र नहीं आता। शिकायत करने पर भी कई बार वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से संपर्क नहीं हो पाता।
जनता की पीड़ा: चुनाव के बाद सब भूल जाते हैं नेता
स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनावों के दौरान जनता को याद किया जाता है, लेकिन बाद में समस्याएँ सुनने वाला कोई नहीं होता। लोग यह भी आरोप लगा रहे हैं कि नई पीढ़ी के कुछ पत्रकार भी जनसमस्याओं की बजाय प्रशंसा–परक रिपोर्टिंग में व्यस्त हैं, जिससे प्रशासनिक अधिकारियों पर भी गलत संदेश जाता है।
लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि मौजूदा सरकार से जनता का भरोसा कम होता जा रहा है। दो साल पूरे भी नहीं हुए, लेकिन ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में असंतोष दिखाई देने लगा है। लोगों का कहना है कि काम और व्यवस्था के परिणाम दिखने चाहिए—सिर्फ कार्यक्रमों में नाच–कूद या बड़े–बड़े घोषणाओं से जनता का भला नहीं होता।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की तरह कर्म आधारित शासन की मिसाल देते हुए लोग कह रहे हैं कि उन्हें भी उसी प्रकार की सख्त और पारदर्शी व्यवस्था चाहिए, न कि केवल राजनीतिक गारंटियों पर टिकी प्रशासन प्रणाली।
अंबिकापुर और बैकुण्ठपुर दोनों जगह जनता स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली से परेशान है। लोग यह संदेश दे रहे हैं कि अस्पतालों में व्यवस्था सुधरे, जवाबदेही तय हो और स्वास्थ्य सेवाएँ मजबूत हों। जनता अपेक्षा कर रही है कि सरकार और विभाग इस स्थिति की गंभीरता को समझकर तुरंत ठोस कदम उठाएँ।



