जयसिंहनगर बारिश का मौसम शुरू होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया, डेंगू, वायरल फीवर, सर्दी-खांसी, उल्टी-दस्त, त्वचा रोग सहित अनेक प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी मौसम में जहरीले सांप, बिच्छू एवं अन्य विषैले जीव-जंतुओं के काटने की घटनाओं का डर भी बना रहता है। ऐसे संवेदनशील समय में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अमझोर में डॉक्टर एवं पर्याप्त स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी क्षेत्र की जनता के लिए चिंता का विषय बन गई है।
विशेष समाचार – बेनी माधव कुशवाहा (डिस्ट्रिक्ट रिपोर्टर शहडोल)

बताया जा रहा है कि पूरे स्वास्थ्य केंद्र की बड़ी जिम्मेदारी सिर्फ 02 नर्सों के मत्थे है। अब सवाल यह है कि आखिर मात्र दो नर्सें ओपीडी, मरीजों की देखभाल, प्रसव सेवा, आपातकालीन उपचार, रात की ड्यूटी और अचानक आने वाले गंभीर मरीजों को कैसे संभालेंगी?
बारिश के मौसम में यदि किसी व्यक्ति को जहरीले सांप या बिच्छू ने काट लिया, अथवा कोई मरीज गंभीर बीमारी की स्थिति में अस्पताल पहुंचता है, तो डॉक्टरों की कमी के कारण उसे तत्काल और समुचित उपचार मिल पाएगा या नहीं—यह एक बड़ा सवाल है। क्या मरीजों की जान जाने के बाद ही स्वास्थ्य विभाग की नींद खुलेगी?
ग्रामीण और गरीब मरीजों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ही इलाज की पहली उम्मीद होता है, लेकिन जब उसी केंद्र में पर्याप्त डॉक्टर और स्टाफ उपलब्ध न हों तो मरीजों को मजबूरी में दूर-दराज के अस्पतालों की ओर भटकना पड़ता है। बारिश के दिनों में खराब रास्ते, लगातार बारिश और आपातकालीन परिस्थितियों के बीच यह समस्या और भी गंभीर हो सकती है।
सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन अमझोर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की वास्तविक स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
केवल भवन और बोर्ड लगा देने से स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत नहीं होती, बल्कि वहां पर्याप्त डॉक्टर, नर्स, दवाइयां और आपातकालीन सुविधाएं होना भी जरूरी है।
क्षेत्रवासियों ने स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि बारिश के मौसम की गंभीरता को देखते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अमझोर में तत्काल डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए, पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध कराया जाए तथा सांप-बिच्छू के काटने और अन्य आपातकालीन बीमारियों के उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

