गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम के नेतृत्व में निकली भव्य रैली, झगराखांड में आतिशबाजी से स्वागत
मनेन्द्रगढ़ अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मनेन्द्रगढ़ क्षेत्र में विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं आदिवासी समाज के लोगों द्वारा उत्साहपूर्वक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
मनेन्द्रगढ़ के पिपरिया इमली गोलाई से भव्य रैली का शुभारंभ किया गया। रैली मनेन्द्रगढ़ शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए नगर पंचायत झगराखांड एवं नगर पंचायत लेदरी पहुंची। रैली में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए और आदिवासी समाज की एकता, अधिकारों तथा सांस्कृतिक पहचान से जुड़े संदेशों को प्रमुखता से रखा गया।

झगराखांड में आतिशबाजी के साथ हुआ स्वागत
रैली के झगराखांड पहुंचने पर स्थानीय लोगों एवं समाज के प्रतिनिधियों द्वारा श्याम सिंह मरकाम एवं अन्य अतिथियों का जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान आतिशबाजी कर उत्साह का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं एवं सामाजिक अधिकारों को लेकर चर्चा भी हुई।
मसीही समाज ने भी किया अतिथियों का भव्य स्वागत
लेदरी में संयुक्त मसीही समाज के तत्वावधान में सामुदायिक भवन में कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां समाज के प्रतिनिधियों द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया तथा विश्व आदिवासी दिवस के महत्व पर विचार रखे गए।
कार्यक्रम में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी एमसीबी जिला अध्यक्ष केवल सिंह मरकाम, विधानसभा क्षेत्र से गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रत्याशी शेख स्माइल, जिला पंचायत सदस्य एवं सभापति डॉ. एल.एस. उदय सहित सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

आदिवासी अधिकार और सांस्कृतिक पहचान पर जोर
मुख्य अतिथि श्याम सिंह मरकाम ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, परंपरा, जल-जंगल-जमीन और प्रकृति के साथ उसके पारंपरिक संबंधों से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि समाज को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने के साथ-साथ शिक्षा, सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों के अधिकारों, सम्मान, संस्कृति और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर विचार करने का अवसर भी है। समाज की नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं इतिहास से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
क्यों मनाया जाता है 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस?
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 1994 में प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को “International Day of the World’s Indigenous Peoples” मनाने की घोषणा की थी। यह दिन आदिवासी/मूलनिवासी समुदायों के अधिकारों, उनकी सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं तथा उनके सामने मौजूद सामाजिक एवं विकास संबंधी चुनौतियों के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
भारत में भी विभिन्न आदिवासी संगठनों एवं सामाजिक समूहों द्वारा 9 अगस्त को रैली, सांस्कृतिक कार्यक्रम, जनसभाओं और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से मनाया जाता है।

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता राकेश देवड़े बिरसावादी ने भी आदिवासी समाज के अधिकारों एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने आदिवासी समाज के अधिकारों और सामाजिक भागीदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सामाजिक एकता और अधिकारों की आवाज
मनेन्द्रगढ़ में आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से आदिवासी समाज की सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और संवैधानिक अधिकारों को लेकर जागरूकता का संदेश दिया गया। आयोजकों ने कहा कि समाज के विकास के लिए शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, जल-जंगल-जमीन और स्थानीय स्तर पर भागीदारी जैसे मुद्दों को प्राथमिकता के साथ उठाया जाना चाहिए।
रिपोर्ट : निलेश सोनी
विशेष संवाददाता, वशिष्ठ टाइम्स

