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छत्तीसगढ़, एमसीबी, बेलबहरा में 30 लाख मछली बीज का संवर्धन, अगस्त में किसानों को मिलेंगे 80 लाख फ्राई बीज महिला स्व-सहायता समूहों, लखपति दीदियों और ग्रामीण मत्स्य पालकों को प्राथमिकता; वैज्ञानिक मत्स्य पालन से बढ़ेगा उत्पादन और ग्रामीणों की आय

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एमसीबी

छत्तीसगढ़, एमसीबी जिले में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने और ग्रामीण परिवारों के लिए स्वरोजगार एवं अतिरिक्त आय के अवसर विकसित करने की दिशा में मत्स्य विभाग द्वारा बड़े स्तर पर मछली बीज उत्पादन एवं वितरण की तैयारी की जा रही है। विकासखंड मनेंद्रगढ़ के बेलबहरा मत्स्य प्रक्षेत्र में तीन नर्सरी तालाबों में 30 लाख मछली बीज (स्पॉन) का संवर्धन किया गया है। अगस्त माह में जिले के मत्स्य पालकों एवं अन्य हितग्राहियों को 80 लाख फ्राई बीज वितरित किए जाएंगे।
सहायक मत्स्य अधिकारी एन.एच. वर्मा ने बताया कि बेलबहरा मत्स्य पालन फार्म हाउस के तीन नर्सरी तालाबों में भारतीय प्रमुख कार्प प्रजातियों रोहू, मृगल, कतला के साथ कॉमन कार्प के स्पॉन का संवर्धन किया गया है। विभाग का उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले स्वस्थ मत्स्य बीज तैयार कर उन्हें जिले के मत्स्य पालकों को समय पर उपलब्ध कराना है।

630 लाख स्पॉन उत्पादन का लक्ष्य
वर्ष 2026-27 के लिए जिले को 630 लाख स्पॉन उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसके विरुद्ध अब तक 195 लाख स्पॉन का उत्पादन किया जा चुका है। शेष लक्ष्य को समय-सीमा में पूरा करने के लिए विभाग द्वारा आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। बीज उत्पादन एवं संवर्धन की प्रत्येक प्रक्रिया पर विशेषज्ञों द्वारा सतत निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं स्वस्थ मछली बीज उपलब्ध हो सके।

तीनों विकासखंडों में विकसित किए जा रहे मत्स्य प्रक्षेत्र
जिले के तीनों विकासखंड मनेंद्रगढ़, खड़गवां एवं भरतपुर में मत्स्य प्रक्षेत्र संचालित हैं। इनमें बेलबहरा (मनेंद्रगढ़), पंचवारपारा तथा ग्राम आमाडांड (खड़गवां) प्रमुख मत्स्य प्रक्षेत्र हैं। यहां वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य बीज उत्पादन, संवर्धन एवं संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। इससे जिले में मत्स्य पालन गतिविधियों को निरंतर विस्तार मिल रहा है।

16 और 17 अगस्त को होगा 80 लाख फ्राई बीज का वितरण
जिले को 80 लाख फ्राई मछली बीज वितरण का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसके तहत 16 एवं 17 अगस्त को मत्स्य पालकों, ग्रामीणों एवं विभिन्न हितग्राहियों को मछली बीज वितरित किया जाएगा। समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज मिलने से किसानों को मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।
भरतपुर, खड़गवां एवं मनेंद्रगढ़ विकासखंड के अंतर्गत आने वाले सिंचाई जलाशयों, ग्रामीण तालाबों, पट्टे पर दिए गए तालाबों तथा मनरेगा से निर्मित तालाबों में मछली बीज का वितरण किया जाएगा। विभाग का प्रयास है कि उपलब्ध जल संसाधनों का वैज्ञानिक तरीके से अधिकतम उपयोग कर जिले की मत्स्य उत्पादन क्षमता में वृद्धि की जाए।

प्रत्येक क्लस्टर में 160 से 170 तालाब
सहायक मत्स्य अधिकारी श्री वर्मा ने बताया कि जिले में प्रत्येक मत्स्य क्लस्टर के अंतर्गत लगभग 160 से 170 तालाब शामिल हैं। इन तालाबों में चरणबद्ध तरीके से मछली बीज उपलब्ध कराया जाएगा। इसके माध्यम से अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को मत्स्य पालन से जोड़कर स्वरोजगार एवं स्थायी आय का माध्यम उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

महिलाओं और लखपति दीदियों को प्राथमिकता
मछली बीज वितरण में स्थानीय ग्रामीणों, महिला स्व-सहायता समूहों एवं लखपति दीदियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के साथ स्व-सहायता समूहों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। विभाग का जोर मत्स्य पालन के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर भी है।

जाल और साइंस किट से मिला आधुनिक मत्स्य पालन को बढ़ावा
सुशासन तिहार के दौरान मत्स्य पालकों को मछली पकड़ने के जाल एवं साइंस किट सहित मत्स्य पालन सामग्री का वितरण भी किया गया था। इन उपकरणों के माध्यम से हितग्राहियों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने में सहायता मिल रही है। विभाग द्वारा उपकरण उपलब्ध कराने के साथ तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है, ताकि मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सके।

प्रशिक्षण से बढ़ रही मत्स्य पालकों की क्षमता
मत्स्य विभाग द्वारा केवल मछली बीज वितरण पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा, बल्कि हितग्राहियों की क्षमता वृद्धि के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मत्स्य पालकों, महिला स्व-सहायता समूहों एवं लखपति दीदियों को जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण में वैज्ञानिक मत्स्य पालन, तालाब प्रबंधन, बीज संवर्धन, रोग नियंत्रण, जल गुणवत्ता, पोषण प्रबंधन एवं आधुनिक मत्स्य उत्पादन तकनीकों की जानकारी दी जाती है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती
मत्स्य विभाग का लक्ष्य जिले के उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए मत्स्य उत्पादन बढ़ाना और ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करना है। बड़े पैमाने पर मछली बीज उत्पादन एवं वितरण की यह पहल जिले में मत्स्य पालन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित करने के साथ ग्रामीण आय बढ़ाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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