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कोरिया, सोनहत, रामगढ़ सेक्टर के आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण आहार व्यवस्था कठघरे में, ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच और कड़ी कार्रवाई की उठाई मांग , जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े से हस्तक्षेप, की मांग; स्टॉक, भुगतान, पोषण आहार वितरण और अभिलेखों की निष्पक्ष जांच की मांग तेज

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सोनहत (कोरिया)।

Report Nilesh Sony

एकीकृत बाल विकास परियोजना, सोनहत के अंतर्गत आने वाले रामगढ़ सेक्टर के कई आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण आहार वितरण एवं शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर ग्रामीणों में गहरा असंतोष व्याप्त है।

ग्रामीण और जानकार सूत्र तथा सूत्रों के वाले से ऐसा पता चला है की
ग्रामीणों एवं कुछ जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं धात्री माताओं को समय पर और नियमित रूप से पोषण आहार उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, जिससे शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासन द्वारा भेजा जाने वाला पोषण आहार निर्धारित मात्रा एवं समय पर उपलब्ध कराया जा रहा है, तो वास्तविक हितग्राहियों तक उसका पूरा लाभ क्यों नहीं पहुँच रहा है।

उनका आरोप है कि कई केंद्रों में वितरण व्यवस्था पारदर्शी नहीं दिखाई देती और अभिलेखों तथा वास्तविक वितरण की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे रामगढ़ सेक्टर के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के स्टॉक रजिस्टर, वितरण पंजी, बिल-वाउचर, भुगतान अभिलेख, महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका, परिवहन व्यवस्था तथा बजट व्यय का उच्चस्तरीय ऑडिट कराया जाए।

साथ ही प्रत्येक केंद्र का भौतिक सत्यापन कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।

जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि जांच में किसी , कर्मचारी अथवा संबंधित की लापरवाही या वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्रचलित नियमों के अनुसार कठोर विभागीय एवं विधिक कार्रवाई की जानी चाहिए,

ताकि भविष्य में इस प्रकार की शिकायतों की पुनरावृत्ति न हो।

ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, कलेक्टर कोरिया, जिला कार्यक्रम अधिकारी
(महिला एवं बाल विकास), संभागीय अधिकारियों तथा प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े से पूरे प्रकरण में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।

उनका कहना है कि यदि समयबद्ध एवं निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होगी और जरूरतमंद बच्चों व माताओं के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध बिना किसी पक्षपात के कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, जिससे आम जनता का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।

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