ग्राम पंचायत चकडाड के आश्रित ग्राम धुमाड़ाड में बदहाल सड़क, मूलभूत सुविधाओं का अभाव; ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जिला पंचायत और स्थानीय विधायक से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
रिपोर्ट: निलेश सोनी | वशिष्ठ टाइम्स 
कोरिया/सोनहत।
ग्राम पंचायत चकडाड के आश्रित ग्राम धुमड़ाड की तस्वीरें विकास के उन दावों की पोल खोल रही हैं, जिनकी चर्चा अक्सर सरकारी मंचों पर की जाती है। आजादी के 78 साल बाद भी विकास से कोसों दूर धुमड़ाड: बरसात में दलदल बनी सड़क, ग्रामीण बोले—“नेता सिर्फ वोट मांगने आते हैं”,
बरसात शुरू होते ही गांव की सड़क पूरी तरह दलदल में तब्दील हो गई है। जगह-जगह कीचड़, गहरे गड्ढे और जलभराव के कारण ग्रामीणों का पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है।
वनांचल क्षेत्र होने के कारण यहां रहने वाले लोगों को रोजमर्रा के कार्यों, इलाज, शिक्षा और आवश्यक सेवाओं के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि आजादी के 78 वर्ष बीत जाने के बाद भी धुमड़ाड गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।चुनाव के समय जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही गांव की सुध लेने कोई नहीं आता। ग्रामीणों ने कहा कि “नेता केवल वोट मांगने आते हैं, लेकिन गांव की बदहाली देखने कभी नहीं आते।”


ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के सरपंच पति पर मनमानी तरीके से पंचायत संचालन करने का आरोप लगाया है।उनका कहना है कि पंचायत में विकास कार्यों में पारदर्शिता नहीं है तथा 14वें एवं 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग आश्रित ग्राम धुमड़ाड के विकास पर नहीं किया जा रहा है।
इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
बारिश के मौसम में सड़क की स्थिति इतनी भयावह हो जाती है कि मरीजों, गर्भवती महिलाओं, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई बार आपातकालीन स्थिति में वाहन भी गांव तक नहीं पहुंच पाते, जिससे ग्रामीणों की जान तक जोखिम में पड़ जाती है।
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर कोरिया, जिला पंचायत , स्थानीय विधायक एवं संबंधित अधिकारियों से तत्काल मौके का निरीक्षण कर सड़क निर्माण, मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा पंचायत में हुए विकास कार्यों और वित्तीय मदों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को विवश होंगे।अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कितनी शीघ्रता से कार्रवाई करता है और वर्षों से उपेक्षित धुमड़ाड गांव को राहत मिलती है या नहीं।

