सोनहत, मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
जनपद पंचायत सोनहत की ग्राम पंचायत चकड़ड़ से जुड़े एक मामले में जांच के बाद मनरेगा कार्यों में फर्जी हाजिरी का आरोप सही पाए जाने पर संबंधित रोजगार सहायक से 62,304 रुपये जमा कराने के आदेश दिए गए हैं।
इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में पंचायत व्यवस्था और मनरेगा कार्यों की निगरानी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत पाराडोल के एक ग्रामीण द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी कि मनरेगा कार्य में फर्जी हाजिरी दर्ज कर सरकारी राशि का भुगतान कराया गया।
शिकायत की जांच जनपद पंचायत स्तर पर कराई गई, जिसमें अनियमितता की पुष्टि होने के बाद संबंधित रोजगार सहायक के विरुद्ध राशि वसूली की कार्रवाई प्रारंभ की गई।
ग्रामीणों का आरोप—पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा कार्यों में फर्जी हाजिरी और रिकॉर्ड में गड़बड़ी जैसे आरोप पहले भी अलग-अलग पंचायतों में सामने आते रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होगी।
जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) तथा संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि जिन रोजगार सहायकों पर जांच में अनियमितता सिद्ध हो, उन्हें संबंधित ग्राम पंचायतों से हटाकर निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़ी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।
मनरेगा में पारदर्शिता पर उठे सवाल
मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि कहीं फर्जी हाजिरी, रिकॉर्ड में हेरफेर या भुगतान में अनियमितता होती है तो यह सीधे सरकारी धन और मजदूरों के अधिकारों पर असर डालता है। ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई, वसूली तथा आवश्यक होने पर अन्य वैधानिक कार्रवाई भी की जा सकती है।

