(रिपोर्ट: /वशिष्ठ टाइम्स अखबार
एमसीबी/कोरिया
(छत्तीसगढ़):
छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र कोरिया जिले में रेत माफिया के खूनी खेल ने कानून-व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। नौगई गांव में हुए सनसनीखेज हत्याकांड में भाजपा नेता भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह सहित तीन लोगों की निर्मम हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है।
अब इस मामले में मुख्य आरोपी मनोज त्रिपाठी समेत चार आरोपियों ने मनेंद्रगढ़ थाने में आत्मसमर्पण कर दिया है, लेकिन इस सरेंडर ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
कार में जिंदा जलाकर हत्या — कानून का खुला मजाक
मंगलवार देर रात जिस तरह से आरोपियों ने फॉर्च्यूनर वाहन को घेरकर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी, वह केवल हत्या नहीं बल्कि कानून व्यवस्था को खुली चुनौती थी। इस बर्बर वारदात में एक नेता को जिंदा जला दिया गया, जबकि दो अन्य लोगों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। यह घटना दर्शाती है कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं।
इस पूरे मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। एक ओर मृतक भाजपा नेता सत्ताधारी खेमे के प्रभावशाली व्यक्तियों के करीबी बताए जा रहे हैं, वहीं आरोपी पक्ष के भी राजनीतिक संबंध सामने आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है—क्या रेत माफिया को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है? क्या प्रशासन जानबूझकर आंख मूंदे बैठा था?
रेत का काला कारोबार बना मौत का कारण
सूत्रों के अनुसार चिरमिरी क्षेत्र के रेत घाट को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। अवैध खनन, वसूली और क्षेत्रीय दबदबे की लड़ाई ने आखिरकार खूनी रूप ले लिया। यह घटना सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की सड़ांध को उजागर करती है।
सरेंडर या दबाव का परिणाम?
मुख्य आरोपी सहित चार लोगों का सरेंडर पुलिस की कार्रवाई का परिणाम कम और बढ़ते जनदबाव का असर ज्यादा माना जा रहा है।
जनता में उबाल, संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनी
इस जघन्य हत्याकांड के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश है। सामाजिक संगठनों और करणी सेना ने निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है।
साथ ही सीबीआई जांच और नार्को टेस्ट की मांग भी तेज हो गई है।
प्रदेश में लगातार बढ़ रहे अवैध खनन और उससे जुड़े अपराधों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह घटना आने वाले समय में और बड़े अपराधों को जन्म दे सकती है।
अब देखना यह है कि यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में जाता है या वास्तव में दोषियों को सजा मिलती है और प्रदेश में कानून का राज स्थापित होता है।

