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कोरिया/छत्तीसगढ़ | कोरिया वन मंडल में भ्रष्टाचार का जंगल? देवगढ़ परिक्षेत्र के निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताओं के आरोप, विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल ट्रेंचिंग से लेकर बोल्डर चेक डैम और तार घेराव तक—गुणवत्ता की अनदेखी कर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग तेज……….

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कोरिया/छत्तीसगढ़ |
विशेष संवाददाता
Nilesh Sony

कोरिया वन मंडल के देवगढ़ परिक्षेत्र में कराए जा रहे विभिन्न निर्माण कार्यों में कथित भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

क्षेत्र में किए गए विकास एवं संरक्षण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ता जा रहा है।

आरोप है कि जंगल संरक्षण और जल संवर्धन के नाम पर करोड़ों रुपये के कार्य तो कागजों में पूरे दिखा दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकांश निर्माण कार्य निम्न गुणवत्ता और लापरवाही की भेंट चढ़ गए।

जिन कार्यों में गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे हैं उनमें मुख्य रूप से ट्रेंचिंग, बोल्डर चेक डैम, कंटूर ट्रेंच और तार घेराव शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार कई स्थानों पर बनाई गई ट्रेंच पहली बारिश में ही बहने लगी हैं, जबकि बोल्डर चेक डैमों में मानक सामग्री और तकनीकी गुणवत्ता का पालन नहीं किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।

तार घेराव कार्यों में भी कमजोर सामग्री उपयोग किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे वन सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

वन विभाग की योजनाओं का उद्देश्य जहां पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण बताया जाता है, वहीं अब इन्हीं योजनाओं पर भ्रष्टाचार की परतें चढ़ने के आरोप लग रहे हैं।

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो जंगल संरक्षण के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट का यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।

मामले को लेकर उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजने की तैयारी की जा रही है। शिकायत में संबंधित अधिकारियों, निर्माण एजेंसियों और जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।

जनता के बीच उठ रहे बड़े सवाल

क्या वन संरक्षण योजनाएं सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई हैं?

क्या गुणवत्ता जांच और तकनीकी निरीक्षण केवल औपचारिकता तक सीमित है?

आखिर जंगल सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर भ्रष्टाचार कब तक चलता रहेगा?

वन क्षेत्रों में इस प्रकार की अनियमितताएं जारी रहीं, तो इसका सीधा असर पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों और जैव विविधता पर पड़ेगा।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेकर जांच कराता है या फिर आरोपों का यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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