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“नल-जल योजना बनी ‘कागजी विकास’: दरैन पंचायत में टंकी खड़ी, पर टोटियां सूखी — जिम्मेदारों पर उठे सवाल”……….

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शहडोल (जयसिंहनगर) |
विशेष रिपोर्ट/बेनी माधव कुशवाहा….

भीषण गर्मी के इस दौर में जहां सरकार हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं ग्राम पंचायत दरैन की हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।

यहां नल-जल योजना पूरी तरह ठप पड़ी है। सूत्रों के अनुसार, लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई पानी की टंकी आज तक ग्रामीणों की प्यास नहीं बुझा पाई।

हालात यह हैं कि टंकी बनने के बाद से अब तक टोटियां सूखी की सूखी ही हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पानी के अभाव में उन्हें कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

खासकर महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इस गंभीर स्थिति के बावजूद जिम्मेदार विभाग और पंचायत प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

प्रथम दृष्टया यह मामला ग्राम पंचायत दरैन के सरपंच और सचिव की लापरवाही का प्रतीत होता है,

जिनकी उदासीनता के कारण करोड़ों की योजना सिर्फ दिखावे तक सीमित रह गई है।

प्रशासनिक और राजनीतिक सवाल:
जिला प्रशासन, जनपद पंचायत और जल जीवन मिशन से जुड़े अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी कटघरे में है।

आखिर इतनी बड़ी योजना के ठप होने की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

वहीं क्षेत्रीय विधायक और जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।

क्या जनता की बुनियादी जरूरतों से जुड़े इस मुद्दे पर उनकी जिम्मेदारी सिर्फ घोषणाओं तक सीमित रह गई है?

जवाबदेही तय करने की मांग:
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर और जिला पंचायत से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और पंचायत प्रतिनिधियों पर की जाए।

साथ ही, नल-जल योजना को तत्काल चालू कर ग्रामीणों को राहत दी जाए।

दरैन पंचायत की यह स्थिति सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं में व्याप्त लापरवाही और भ्रष्टाचार की एक बड़ी तस्वीर पेश करती है।

अगर समय रहते जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं इसी तरह कागजों तक सीमित रह जाएंगी।

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