विशेष रिपोर्ट | निलेश सोनी
📍 जिला कोरिया (छत्तीसगढ़)
“छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की कैलाशपुर पंचायत में फर्जी भुगतान, अधूरे मकान—प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल, -विधायक से हस्तक्षेप की मांग”
—
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अब गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरती नजर आ रही है।
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले अंतर्गत ग्राम पंचायत कैलाशपुर के आश्रित ग्राम तेली मुड़ा के सिगार साय पिता राम चरन जाति चेरवा से सामने आए मामले ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि जिला पंचायत पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोप है कि पंचायत सचिव लक्ष्मी नारायण कुर्रे, जो एक साथ कई पंचायतों (बेलिया, कैलाशपुर, दामुज) का प्रभार संभाल रहे हैं,
रोजगार सहायक के साथ मिलकर हितग्राहियों के नाम पर तीसरी किस्त तक की राशि निकाल ली, जबकि जमीनी स्तर पर आवास निर्माण अधूरा है।

—
🟥 फर्जी जिओ-टैगिंग से सरकारी धन की निकासी
सूत्रों के अनुसार, आश्रित ग्राम तेलीमुड़ा निवासी हितग्राही सिगार साय (पिता–रामचरन, जाति–चेरवा) के नाम पर आवास की पूरी राशि निकाल ली गई।
मौके पर केवल प्रतीकात्मक निर्माण दिखाकर फर्जी जिओ-टैगिंग कर दी गई, जिससे सिस्टम में निर्माण पूर्ण दर्शा दिया गया।
यह सीधे-सीधे सरकारी धन के दुरुपयोग और योजनागत धोखाधड़ी का मामला माना जा रहा है।
—
“सचिव के सामने सरपंच भी बेबस” — जमीनी हकीकत



ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर खुलेआम भ्रष्टाचार हो रहा है, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
सरपंच ने भी नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया कि:
“सचिव और रोजगार सहायक के सामने हमारी नहीं चलती, हम सिर्फ मूकदर्शक हैं।”
—
🟥 प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर सवाल
जब इस मामले में जनपद पंचायत के सीईओ से संपर्क किया गया, तो उन्होंने केवल “जांच जारी है” कहकर जवाब टाल दिया।
इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं—क्या यह मिलीभगत या दबाव का परिणाम है?
—
🟥 राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बढ़ा दबाव
जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने मांग की है कि:
उच्चस्तरीय (जिला/राज्य) जांच समिति गठित हो
जिन हितग्राहियों के नाम पर राशि निकाली गई, उन्हें वास्तविक लाभ दिलाया जाए
एक सचिव को कई पंचायतों का प्रभार देने की व्यवस्था की समीक्षा की जाए
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को सख्त किया जाए
—
विधायक से हस्तक्षेप की मांग
ग्रामीणों ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री और क्षेत्रीय विधायक से सीधे हस्तक्षेप कर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला सरकार की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर आंच ला सकता है।
—
सरकार जहां गरीबों को पक्का मकान देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर कुछ अधिकारी इस योजना को “कमाई का जरिया” बना रहे हैं।
कैलाशपुर पंचायत का यह मामला एक सिस्टमेटिक फेल्योर और भ्रष्ट तंत्र की ओर इशारा करता है
—जहां जवाबदेही तय करना अब बेहद जरूरी हो गया है।
—
अगर इस तरह के मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की साख पर गहरा असर पड़ सकता है।

